LG vs Kejriwal: SC के फैसले पर बोले CM केजरीवाल, 'उपराज्यपाल और BJP का साथ स्पष्ट'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उपराज्यपाल को राजनीति के अखाड़े में नहीं कूदना चाहिए। MCD Poll केस में भी SC से जीत मिली। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ये बात साफ हो गई है कि उपराज्यपाल और बीजेपी एक साथ हैं।

LG vs Kejriwal का एक और नमूना उस समय सामने आया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से मिली जीत के बाद कहा, यह साफ हो गया है कि उपराज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक साथ हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर का चुनाव कराने पर अहम फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट MCD Mayor चुनाव पर क्या बोली
देश की सबसे बड़ी कोर्ट ने कहा कि 24 घंटे के अंदर MCD Mayor का नोटिफिकेशन जारी किया जाए। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि मनोनीत पार्षद मेयर के चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे।
SC का ऑर्डर लोकतंत्र की जीत, ढाई महीने बाद मेयर मिलेगा
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र की जीत है। दिल्ली नगर निगम में महापौर के चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह "साबित" हो गया है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना और भाजपा "अवैध और असंवैधानिक" आदेश पारित करने में भागीदार थे। उन्होंने ट्वीट किया, "सुप्रीम कोर्ट का आदेश लोकतंत्र की जीत है। सुप्रीम कोर्ट को बहुत-बहुत धन्यवाद। दिल्ली को अब ढाई महीने बाद मेयर मिलेगा।"
संविधान का उल्लंघन किया, इस्तीफा दें LG
आम आदमी पार्टी (AAP)के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भी केजरीवाल के सुर में सुर मिलाते दिखे। उन्होंने @raghav_chadha हैंडल से किए ट्वीट में लिखा, दिल्ली जीत गई! राघव चड्ढा ने कहा, उपराज्यपाल को दिल्ली के लोगों से माफी मांगनी चाहिए और तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए। उनके कार्यों और आदेशों ने बार-बार संविधान का उल्लंघन किया है।
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भाजपा पर गंदी चाल चलने के आरोप
बकौल राघव चड्ढा, बीजेपी ने दिल्ली को मेयर से वंचित करने के लिए किताब में हर गंदी चाल की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी पूरी और बुरी तरह से हार गई है।
MCD Mayor के बाद उपमहापौर का चुनाव होगा
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उपराज्यपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने कथित तौर पर भाजपा का पक्ष लिया था। मामला महापौर के चुनाव पर मनोनीत पार्षदों की वोटिंग का है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के प्रतिनिधि उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के नागरिक निकाय (MCD) में जिन पार्षदों की नियुक्ति की है, ये मनोनीत सदस्य महापौर चुनने के लिए चुनाव में मतदान नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा, मेयर के चुनाव के बाद ही डिप्टी मेयर का चुनाव किया जा सकता है।
एक महीने में तीन बार टालना पड़ा चुनाव
दिल्ली के उपराज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री के टकराव के मामले में ये जानना भी रोचक है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) ने LG विनय सक्सेना पर आरोप लगाए थे। इसके बाद दो महीने में महापौर का चुनाव तीन बार स्थगित करना पड़ा। आरोप लगे कि भाजपा ने महापौर के पद के लिए भाजपा नेता का चुनाव करके नागरिक निकाय पर कब्जा करने की कोशिश की।
दिसंबर में MCD इलेक्शन, AAP ने क्या आरोप लगाए?
बता दें कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के लिए दिसंबर में चुनाव हुए। आप ने भाजपा से कहीं अधिक सीटें जीती थीं। इस नतीजे के बाद विधानसभा में विपक्षी पार्टी भाजपा का 15 साल का MCD शासन समाप्त हो गया था। उपराज्यपाल ने जिन सदस्यों या एल्डरमैन (aldermen) को नियुक्त किया, उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान करने की कोशिश की थी, जिसके कारण आप सदस्यों ने विरोध किया और सदन में हंगामा हुआ था। हंगामे के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था। आप ने आरोप लगाया था कि नेताओं ने भाजपा की संख्या में इजाफा किया होगा।
संवैधानिक रूप से SC की गंभीर टिप्पणी
बता दें कि सीएम केजरीवाल ने यह तीखा हमला ऐसे समय में किया है, जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक अन्य मामले में कहा कि उपराज्यपालों को राजनीतिक अखाड़े में नहीं कूदना चाहिए। शीर्ष अदालत की टिप्पणी संवैधानिक रूप से बेहद गंभीर मानी जा रही है।












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