रेखा गुप्‍ता के सीएम बनने से केजरीवाल और कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल, जानिए कैसे?

Delhi News: दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही राजनीति माहौल में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलने वाला है। अभी तक आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल के निशाने पर दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) रहा करते थे। केजरीवाल और उनकी आप सरकार हमेशा हर मुद्दें को दिल्‍ली एलजी से उलझी रहती थी लेकिन अब केजरीवाल के साथ कांग्रेस का निशाना सीएम रेखा गुप्‍ता पर ही केन्द्रित होने वाला है।

हाालांकि दोनों के लिए ये आसान नहीं होगा क्‍योंकि महिला नेता रेखा गुप्‍ता के मुख्‍यमंत्री बनाए जाने से दोनों पार्टियों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। आइए जानते हैं कैसे?

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बात दें रेखा गुप्ता के मुख्यमंत्री बनने से दिल्ली में राजनीतिक हलचल मचा दी है। इसकी वजह ये है कि भाजपा शासित राज्‍यों में किसी महिला सीएम के ना होने की अनुपस्थिति को उन्‍होंने भर कर अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस की बोलती बंद करवा दी है। रेखा गुप्‍ता को सीएम बनाए जाने से भाजपा की एक भी महिला सीएम ना होने के विपक्ष के आरोप ने दम तोड़ दिया है।

कांग्रेस जो महिला सीएम शीला दीक्षित का नाम लेकर दम भरा करती थी और आम आदमी पार्टी आतिशी को सीएम बनाकर उदाहरण दिया करती थी रेखा गुप्‍ता के सीएम बनने से वो सवाल अब खत्‍म हो चुका है। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी की आतिशी की तरह रेखा गुप्ता जो पहली बार विधायक बनी और उन्‍हें दिल्‍ली का मुख्‍यमंत्री बनाकर आम आदमी पार्टी को मुंह तोड़ जवाब दे दिया है। भले ही ये संयोग है लेकिन आप की बोलती बंद करने के लिए ये काफी है।

रेखा गुप्‍ता पहले दिन से ही हुई अलर्ट

बता दें रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाने के भाजपा के फैसले का स्वागत किया गया है, खास तौर पर पार्टी द्वारा महिलाओं को 2500 रुपये मासिक भुगतान के माध्यम से उनकी वित्तीय स्थिरता बढ़ाने के वादे को देखते हुए। चुनाव के दौरान सभी प्रमुख दलों द्वारा दोहराया गया यह वादा महिला वोट बैंक के लिए है लेकिन रेखा गुप्‍ता ने सीएम बनने से पहले ही बता दिया कि भाजपा सरकार दिल्‍ली की महिलाओं को ये 2500 रुपये की धनराशि कब दी जाएगी। रेखा गुप्‍ता को ऐसे ही आगे भी अलर्ट रहना होगा।

कांग्रेस और आप को ऐसे ही मौका नहीं देगी भाजपा

बता दें भारत के बाकी राज्‍यों की तुलना में, दिल्ली का अनूठा राजनीतिक माहौल बयानबाज़ी के वादों से ज़्यादा ठोस नतीजों की मांग करता है, एक ऐसी वास्तविकता जिसका सामना करने के लिए भाजपा सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व में तैयार नजर आ रही है।

आप और कांग्रेस से आने वाली चुनौतियों को भांपते हुए भाजपा ने पहले से ही अपना रुख बदलकर ज़्यादा रक्षात्मक रुख अपना लिया है। रेखा गुप्ता के शपथ ग्रहण से पहले ही यमुना नदी की सफाई सहित दिल्ली के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर उनके ध्यान दिया जाना शुरू कर दिया गया है। ऐसे ही पार्टी इस बात से पूरी तरह वाकिफ़ है कि शासन में सफलता, ख़ास तौर पर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कानून प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में, जनता का समर्थन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

भाजपा ने भी शुरू की रेवड़ी राजनीति

आम बोलचाल की भाषा में 'रेवड़ी राजनीति' यानी लोकलुभावने वादे की ओर भाजपा भी बढ़ चुकी है, यह एक ऐसी रणनीति है जिसे पहले केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने अपनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आप के शासन मॉडल की आलोचना, जो लोगों को मुफ्त सुविधाएं प्रदान करने पर केंद्रित थी, ने भाजपा की अभियान रणनीति को प्रभावित किया है। 'रेवड़ी' शब्द, जिसे मोदी ने शुरू में आप की नीतियों की आलोचना करने के लिए इस्तेमाल किया था, अब 'गरीब कल्याण योजना' में बदल गया है, भाजपा ने भी इसी तरह के दृष्टिकोण को अपनाया है और दिल्‍ली वासियों के लिए कई फ्री योजना का ऐलान चुनाव से पहले ही कर दिया है।

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