बलात्कार के आरोप से बरी शख्स को क्यों ना कहा जाए 'रेप सरवाइवर', अदालत में उठा सवाल

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नई दिल्ली। इन दिनों 'रेप विक्टिम' को आमतौर पर 'रेप सरवाइवर' कहा जाता है। क्या एक व्यक्ति जिसे कोर्ट ने रेप के आरोप में बरी कर दिया हो तो क्या उसे 'रेप केस सरवाइवर' कहा जा सकता है? यह सवाल तीस हजारी कोर्ट के स्पेशल जज ने पास्को एक्ट के तहत रेप के आरोप में बरी किए गए एक आदमी के संदर्भ में पूछा है।

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2012-13 में पश्चिमी दिल्ली के रान्होला इलाके की रहने वाली एक लड़की जिसके बालिग होने में एक माह कम था उसने एक रेप का केस दर्ज करवाया था। जब इस मामले में चार्जशीट फाइल की गई तो कोर्ट में लड़की अपने बयान से पलट गई। कोर्ट के सामने लड़की ने कहा कि वह उस व्यक्ति से प्यार करती है। उनसे सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन जब लड़के ने शादी से इंकार कर दिया तो वह परेशान हो गई और उसने लड़के खिलाफ रेप का केस दर्ज करवा दिया।

मुकदमा दर्ज करने के साढ़े चार साल बाद अभियुक्त को बरी कर दिया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने कहा, 'हाल के दिनों में रेप पीड़िता को अभिव्यक्ति रुप में रेप सरवाइवर कहा जा रहा है।' अभियोजन पक्ष द्वारा जिस महिला या लड़की के साथ रेप किया गया है और वह जिंदा है तो उसे रेप सरवाइवर कहा जाता है। लेकिन जब अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत उस व्यक्ति को आरोपी नहीं ठहरा पाते है जिसके बाद वह बाइज्जत बरी कर दिया जाता है।

ऐसी परिस्थितियों में जिस निर्दोष व्यक्ति को जांच और परीक्षण के दौरान काफी समय तक हिरासत में रखा जाता है, और उसे बाद में ससम्मान बरी कर दिया जाता है तो क्या उसे अब 'रेप केस सरवाइवर' के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए?

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English summary
judge asks a man who is honourably acquitted after a considerable period be addressed as a rape case survivor

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