किसान आंदोलन कोई शाहीन बाग वाला धरना नहीं कि सरकार जब चाहे उखाड़ फेंके: राकेश टिकैत
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली को फिर घेरने की तैयारी में जुटे किसान संगठनों पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का कहना है कि, आंदोलन रुका ही नहीं था, बल्कि यह अब और तेज होने जा रहा है। राकेश टिकैत ने कहा कि, किसान आंदोलन शाहीन बाग वाला धरना नहीं है, जिसे सरकार जब चाहे उखाड़ फेंके, दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों के जत्थे नए कृषि कानून वापस होने के बाद ही हटेंगे।
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26 मई को काला दिवस मनाएंगे प्रदर्शनकारी
बता दिया जाए कि, राकेश टिकैत बीते रोज चंडीगढ़ और पंजाब के किसान नेताओं से मिले। जहां किसान नेता ने कहा, "दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों का आंदोलन शाहीन बाग जैसा धरना नहीं है कि सरकार जब चाहे उखाड़ फेंके। हमारा यह धरना तो तब तक चलेगा जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेकर एमएसपी का भरोसा नहीं दे देती।"
इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में 40 से ज्यादा किसान संगठनों ने 26 मई को 'काला दिवस' मनाने का फैसला किया है। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पद पर 7 साल और किसान संगठनों के आंदोलन को 6 महीने पूरे होंगे।

"आंसूगैस से पीछे नहीं हटा सकती सरकार"
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पिछले दिनों कोरोना संक्रमण फैलाने के आरोपों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया था। टिकैत ने कहा था कि, कोरोना का रास्ता अस्पताल जाता है और किसान का रास्ता संसद (पार्लियामेंट) के लिए जाता है। दोनों के रास्ते अलग हैं। हरियाणा के रेवाड़ी में प्रदर्शनकारियों से भेंट के दौरान भी टिकैत ने जोर देकर कहा कि, किसानों पर लाठीचार्ज या आंसूगैस दागकर सरकार उन्हें पीछे नहीं हटा सकती। वह जहां बैठे हैं, वहां डटे रहेंगे।"

"जनप्रतिनिधि घरों में आइसोलेटेड हैं"
पिछले दिनों राकेश टिकैत ने कहा था, "ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के कहर से हाहाकार मचा है। डॉक्टर, दवाई, टेस्टिंग उपलब्ध नहीं है। जनप्रतिनिधि घरों में आइसोलेटेड हैं। सरकार ने गांवों को भगवान भरोसे छोड़ दिया। सरकार फेल हुई है। कुछ तो करो सरकार, लोग घर-घर में हैं बीमार।"

"हम शिफ्टों में किसान बुला रहे हैं"
राकेश टिकैत ने कहा कि, कोरोना संक्रमण को देखते हुए ज्यादा भीड़ के बजाय शिफ्टों में किसान बुलाए जा रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा, "कोरोना की आड़ में धरने समाप्त कराना चाहती हैं, लेकिन किसान उठने वाला नहीं है। धरना लगातार चलता रहेगा।"












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