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Jagdeep Dhankhar: 6 महीने बाद भी घर नहीं, धनखड़ को क्यों नहीं मिला सरकारी बंगला? क्या है पीछे की बड़ी गुत्थी

Jagdeep Dhankhar Government Bungalow Row: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद छोड़े हुए करीब छह महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनका हक का सरकारी आवास नहीं मिल पाया है। यह मामला इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि इससे पहले किसी भी पूर्व उपराष्ट्रपति को सरकारी बंगले के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। सवाल यह है कि आखिर सिस्टम में ऐसा क्या अटक गया है, जिसकी वजह से देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति आज भी निजी फार्महाउस में रहने को मजबूर हैं।

21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया था। इस्तीफे की वजहों पर तब भी सवाल उठे, लेकिन धनखड़ ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया। इसके करीब 42 दिन बाद सितंबर 2025 में उन्होंने उपराष्ट्रपति का सरकारी आवास भी खाली कर दिया। नियमों के मुताबिक, उन्होंने नए सरकारी बंगले के लिए हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में आवेदन भी दे दिया।

Jagdeep Dhankhar

5 महीने बीते, फिर भी बंगला नहीं

इस्तीफे को छह महीने और आवेदन को करीब पांच महीने गुजर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। धनखड़ फिलहाल दिल्ली के छतरपुर स्थित एक निजी फार्महाउस में रह रहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उनके करीबी लोगों का कहना है कि सितंबर में उन्हें बताया गया था कि उनके नाम से बंगला अलॉट हो चुका है और मरम्मत का काम चल रहा है, जिसमें करीब तीन महीने लगेंगे। नवंबर और फिर जनवरी में जब दोबारा स्थिति पूछी गई, तो हर बार वही जवाब मिला-"रेनोवेशन चल रहा है।"

अधिकारी कुछ और, मंत्री कुछ और कह रहे

यहीं से कहानी में ट्विस्ट आता है। धनखड़ के करीबी जहां बंगला अलॉट होने और मरम्मत की बात कहते हैं, वहीं हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के राज्य मंत्री तोखन साहू का दावा बिल्कुल उलट है। उनके मुताबिक, अभी तक कोई बंगला अलॉट ही नहीं हुआ है। मंत्री का कहना है कि जैसे ही पूर्व उपराष्ट्रपति किसी बंगले को पसंद करेंगे, तुरंत अलॉटमेंट कर दी जाएगी। दोनों दावों में जमीन-आसमान का फर्क है, जिससे भ्रम और गहरा जाता है।

बंगला नंबर 34 और सच्चाई

सूत्रों के मुताबिक, एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित टाइप-8 का बंगला नंबर 34 जगदीप धनखड़ को देने की प्रक्रिया चल रही थी। मीडिया में भी इसकी खबरें आईं। लेकिन जब दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। बंगला वीरान पड़ा था, न सफाई, न मरम्मत, न मजदूर। वहां तैनात गार्ड ने भी साफ कहा कि न तो बंगला अलॉट हुआ है और न ही किसी तरह के रेनोवेशन का आदेश आया है।

क्या दबाव में छोड़ा गया पुराना आवास?

एक सवाल यह भी उठता है कि क्या धनखड़ ने नया बंगला मिलने से पहले ही दबाव में आकर पुराना सरकारी आवास खाली कर दिया। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, पहले चर्चा थी कि नया बंगला मिलने के बाद ही वे शिफ्ट करेंगे, लेकिन सितंबर 2025 में उन्होंने बिना नया ठिकाना मिले ही आवास छोड़ दिया। वहीं, धनखड़ के करीबी बताते हैं कि उन्हें कहा गया था कि नई व्यवस्था में कम से कम तीन महीने लगेंगे।

पहले कभी नहीं हुई इतनी देरी

विभागीय सूत्रों का कहना है कि इससे पहले पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी को रिटायरमेंट के एक-दो महीने के भीतर ही सरकारी बंगला मिल गया था। वेंकैया नायडू के लिए तो कार्यकाल खत्म होने से पहले ही बंगला तय कर लिया गया था। ऐसे में धनखड़ के मामले में हो रही देरी कई सवाल खड़े करती है।

पूर्व उपराष्ट्रपति को क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

'उपराष्ट्रपति पेंशन अधिनियम, 1997' के तहत पूर्व उपराष्ट्रपति को आजीवन पेंशन, टाइप-8 सरकारी बंगला, मुफ्त बिजली-पानी, मेडिकल सुविधाएं, स्टाफ, Z या Z+ सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं मिलती हैं। टाइप-8 बंगले आमतौर पर केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट जज और शीर्ष संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को दिए जाते हैं।

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