दिल्ली हिंसा: कोर्ट ने जांच के स्तर को बताया 'बहुत खराब', कहा- पुलिस कमिश्नर करें हस्तक्षेप
नई दिल्ली, 29 अगस्त। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में हुई हिंसा को एक साल से अधिक समय हो चुका है। शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस के जांच के स्तर को बहुत खराब बताते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने 25 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों पर कथित तौर पर तेजाब, कांच की बोतलों और ईंटों से हमला करने के आरोप में अशरफ अली के खिलाफ आरोप तय करते हुए यह टिप्पणी की।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) ने कहा, यह ध्यान देने योग्य है कि बड़ी संख्या में दंगों के मामलों में जांच का स्तर बहुत खराब है। आधी-अधूरी चार्जशीट दाखिल करने के बाद पुलिस शायद ही जांच को तार्किक अंत तक ले जाने की परवाह करती है, जिसके कारण कई मामलों में नामजद आरोपी जेलों में बंद रहते हैं। यह मामला एक बेहद गंभीर उदाहरण है, यहां पीड़ित स्वयं पुलिसकर्मी हैं फिर भी आईओ ने एसिड का नमूना एकत्र करने और उसका रासायनिक विश्लेषण करने की जहमत नहीं उठाई। इसके अलावा आईओ ने घायलों को आई चोटों की जांच करने की भी जहमत नहीं उठाई।
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न्यायाधीश ने आईओ को फटकार लगाते हुए कहा कि आप अभियोजकों को आरोपों पर बहस के लिए ब्रीफ नहीं कर रहे हैं और सुनवाई की सुबह उन्हें चार्जशीट की पीडीएफ केवल ई-मेल कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है ताकि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और उचित निर्देश दें। सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आगे कहा कि यह उचित समय है कि उत्तर-पूर्वी जिले के डीसीपी और अन्य उच्च अधिकारी उनके द्वारा की गई टिप्पणियों पर ध्यान दें और मामलों में आवश्यक कार्रवाई करें। वे इस संबंध में विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए स्वतंत्र हैं, ऐसा न करने पर इन मामलों में शामिल व्यक्तियों के साथ अन्याय होने की संभावना है।












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