Delhi News: दिल्ली की सड़कों को चमकाने का मास्टर प्लान तैयार! सरकार खर्च करेगी 1487cr, हर दिन चलेगा महाअभियान
Delhi Road Cleaning Plan: दिल्ली की हवा और सड़कों की हालत सुधारने के लिए दिल्ली सरकार अब बड़ा और ठोस कदम उठाने जा रही है। राजधानी की करीब 2800 किलोमीटर सड़कों को रोजाना साफ करने के लिए सरकार ने 1487 करोड़ रुपये का विशाल प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस योजना के तहत दिल्ली की मुख्य सड़कों पर हर दिन आधुनिक मशीनों से सफाई की जाएगी, ताकि धूल और प्रदूषण पर काबू पाया जा सके।
तीन जोन में बंटी दिल्ली, हर इलाके के लिए अलग बजट
दिल्ली सरकार के मास्टरप्लान के मुताबिक राजधानी को तीन बड़े जोन में बांटा गया है। इनमें नॉर्थ, साउथ और ईस्ट जोन शामिल हैं। नॉर्थ जोन में सफाई व्यवस्था पर करीब 564.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे। साउथ जोन के लिए 465 करोड़ और ईस्ट जोन के लिए 385 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। यह पूरा खर्च 10 साल की अवधि में किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक सड़कों की सफाई बनी रहे।

डीजल नहीं, अब इलेक्ट्रिक मशीनें करेंगी सफाई (Delhi road cleaning project)
पहले इस प्रोजेक्ट के लिए डीजल और सीएनजी से चलने वाली मशीनें खरीदने की योजना थी, लेकिन अब सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सभी मशीनें पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी, ताकि सफाई के साथ-साथ प्रदूषण भी न बढ़े। इस प्रोजेक्ट के तहत 70 इलेक्ट्रिक मैकेनिकल रोड स्वीपर, 140 लिटर पिकर मशीनें, 24 इलेक्ट्रिक डस्ट डंपिंग व्हीकल और 6 इलेक्ट्रिक वाटर टैंकर खरीदे जाएंगे।
हर दो दिन में साफ होंगी सभी पीडब्ल्यूडी सड़कें
ये सभी मशीनें उन सड़कों पर लगाई जाएंगी, जिनकी चौड़ाई 60 फीट से ज्यादा है और जिनका रखरखाव लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी करता है। कुल मिलाकर करीब 1410 किलोमीटर लंबी चौड़ी सड़कों पर यह सिस्टम लागू होगा। सरकार का लक्ष्य है कि रोज कम से कम 2800 किलोमीटर लेन की सफाई की जाए, ताकि हर पीडब्ल्यूडी सड़क दो दिन में एक बार जरूर साफ हो।
एमसीडी पर नहीं रहेगी निर्भरता
अभी तक पीडब्ल्यूडी के पास अपनी मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीनें नहीं थीं और उसे नगर निगम यानी एमसीडी की मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता था। एमसीडी की 52 मशीनें ही चौड़ी पीडब्ल्यूडी सड़कों की सफाई करती थीं। अब नए प्रोजेक्ट के बाद पीडब्ल्यूडी की अपनी अलग व्यवस्था होगी, जिससे सफाई का काम ज्यादा नियमित और असरदार होगा।
पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन भी होंगी इस्तेमाल
सिर्फ झाड़ू से सफाई नहीं होगी, बल्कि धूल पूरी तरह खत्म करने के लिए पानी का छिड़काव भी किया जाएगा। रोड स्वीपर, वाटर टैंकर और एंटी-स्मॉग गन एक साथ काम करेंगी, ताकि सड़क की गहराई तक जमी धूल हटाई जा सके। सफाई के बाद सड़कों पर पानी डाला जाएगा, जिससे उड़ती धूल दोबारा हवा में न जाए।
दिल्ली की खराब हवा में धूल की बड़ी भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली के प्रदूषण में सड़क की धूल की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत तक है। एक अध्ययन में सामने आया था कि गड्ढे, टूटी सड़कें, बिना पक्के रास्ते और खराब फुटपाथ धूल के सबसे बड़े स्रोत हैं। यह धूल पीएम10 कणों के रूप में हवा में जाती है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।
साफ सड़कें, साफ हवा की ओर कदम
दिल्ली सरकार का मानना है कि अगर सड़क की धूल पर नियंत्रण पा लिया गया, तो हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखा जा सकता है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ सड़कों को चमकाएगा, बल्कि दिल्लीवालों को साफ और बेहतर हवा देने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा।












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