ब्लैक फंगस की दवा की कालाबाजारी कर रहे एक गैंग के 10 लोगों को दिल्ली पुलिस ने दबोचा
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवा एम्फोटेरिसिन बी की कालाबाजारी करने वाले गिरोह का भंटाफोड़ किया है।
नई दिल्ली, 20 जून। पूरा देश कोरोना वायर और ब्लैक फंगस जैसी महामारी से गुजर रहे हैं, लेकिन ऐसे में भी कुछ लोग इंसानियत को सर्मसार करने से बाज नहीं आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवा एम्फोटेरिसिन बी की कालाबाजारी करने वाले गिरोह का भंटाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने गिरोह के पास से भारी मात्रा में एंटीफंगल दवाएं बरामद की हैं।

डीसीपी क्राइम मोनिका भारद्वाज ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने ब्लैक फंगस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीफंगल दवा एम्फोटेरिसिन बी की कालाबाजारी में शामिल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच के दौरान हमने यूपी के देवरिया निवासी डॉक्टर अल्तमस हुसैन को गिरफ्तार किया। डॉक्टर ने स्वीकार किया है कि उसने एम्फोटेरिसिन बी के 300 एक्सपायर्ड शीशियों को खरीदा और उन शीशियों में पिपेरसिलिन/ताजोबैक्टम दवा को भरकर उन्हें एम्फोटेरिसिन के रूप में बांटा।
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डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने आगे कहा कि कार्रवाई में पुलिस ने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित एक घर से 3 हजार शीशी एंटी-फंगल इंजेक्शन बरामद किये हैं। ये सभी इंजेक्शन नकली है या नहीं इसकी जांच की जा रही है, लेकिन इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि एम्फोटेरिसिन के इंजेक्शन नकली थे। आपको बता दें कि अल्तमश नाम के जिस डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है उसने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है और फिर एम्स से न्यूरोलॉजी में डिप्लोमा किया है। वह ठगी के पांच मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है।
जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी का यह कोई पहला मामला नहीं है, कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ साथ कई जरूरी दवाई की कालाबाजारी की खबरें सामने आई थीं। हालांकि इस बार पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से ऐसी घटनाओं में ज्यादा वृद्धि नहीं हुई।












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