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Delhi New CM: दिल्ली के बाद 'मिशन बंगाल' पर BJP! क्या केजरीवाल की तरह ममता को हटाने का पूरा होगा सपना?

Delhi New CM News: दिल्ली में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी के लिए अब पश्चिम बंगाल एक ऐसा अभेद्य किला बच गया है, जिसे जीतने की कोशिश तो पार्टी एक दशक से कर रही है, लेकिन हर बार ममता बनर्जी की सियासी बाजीगरी से चकमा खा जाती है। दिल्ली के बाद अगला विधानसभा चुनाव बिहार में है, जहां बीजेपी आज भी नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ सत्ता में है। इसलिए,उसके लिए अब 'मिशन बंगाल' उससे भी ज्यादा बड़ा लक्ष्य है।

बंगाल के बीजेपी नेता और राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दिल्ली चुनाव परिणाम वाले दिन ही नतीजे देखने के बाद कहा था, 'दिल्ली की जीत हमारी है, 2026 में बंगाल की बारी है।' दिल्ली और बंगाल में फर्क ये है कि केजरीवाल को नई दिल्ली सीट पर बीजेपी ने पहली बार मात दी है,लेकिन पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर अधिकारी के हाथों ममता 2021 में ही हार चुकी हैं।

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Delhi CM Candidate: दिल्ली के बाद 'बंगाल की बारी' के मायने ?

पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी का बयान इस ओर इशारा करता है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरी तैयारी के साथ 'मिशन बंगाल' लॉन्च करने वाली है।

दरअसल, आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल और टीएमसी की ममता बनर्जी, विपक्षी दलों के यही दो नेता हैं, जिन्होंने पिछले कुछ समय से पीएम मोदी की सियासी हैसियत को टक्कर देने की कोशिश की है। केजरीवाल तो इस बार के चुनाव में उनका नाम लेकर भी अपनी राजनीति के दांव चलने लगे थे। लेकिन, आखिरकार वह बुरी तरह से मात खा गए। ऐसे में अब सिर्फ ममता ही बची हैं, जिन्हें विपक्ष का ऐसा चेहरा माना जा सकता है, जो प्रधानमंत्री मोदी के कद को टक्कर दे सकती हैं।

Delhi New CM News: एक दशक से बंगाल में जीत के सपने बुन रही है भाजपा!

वैसे भी भाजपा के लिए बंगाल खास मायने रखता है। यह भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्म और कर्मभूमि है। केंद्र में 2014 से नरेंद्र मोदी की सरकार है, फिर भी 2016 और 2021 में बंगाल जीतने का पार्टी का सपना चकनाचूर हो चुका है। अलबत्ता, पार्टी अब राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बन चुकी है और विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक में सत्ताधारी टीएमसी(TMC) को टक्कर भी दे रही है।

लेकिन, पश्चिम बंगाल का सियासी परिदृश्य दिल्ली से बिल्कुल अलग है। ममता बनर्जी पिछले करीब डेढ़ दशक से बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं और उनका जनाधार मजबूत है। 2019 के लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन फिर भी ममता ने बड़ी जीत दर्ज की। अब सवाल यह है कि क्या बीजेपी 2026 में टीएमसी को मात दे पाएगी?

Delhi New CM Bengal Strategy: बंगाल के लिए क्या हो सकती है बीजेपी की रणनीति?

बीजेपी ने दिल्ली में केजरीवाल की 'आप' सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार,प्रशासनिक असफलता और कथित कुशासन के मुद्दों को उठाया था। इसी तरह,बंगाल में भी पार्टी ममता सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार,कट मनी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को उठाकर चुनावी नैरेटिव सेट करने की कोशिश करती आई है।

हिंदुत्व: बंगाल में बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति को और आगे बढ़ा सकती है। 2021 के चुनाव में पार्टी ने जय श्रीराम के नारे को लेकर बड़ा अभियान चलाया था, जो कुछ हद तक कारगर भी रहा था।

भ्रष्टाचार: शिक्षक भर्ती घोटाला, नारदा-शारदा घोटाला और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों को बीजेपी बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में पेश कर सकती है।

बंगाली अस्मिता: 2021 में ममता बनर्जी ने बीजेपी को बाहरी पार्टी करार दिया था, जिससे उन्हें फायदा मिला था। इस बार बीजेपी को बंगाल में अपने स्थानीय नेताओं को आगे लाना पड़ सकता।

मुस्लिम वोट बैंक की चुनौती: बंगाल में मुस्लिम वोट टीएमसी (TMC) का मजबूत आधार है। बीजेपी इसके लिए हिंदू वोट को पूरी तरह एकजुट करने की कोशिश कर सकती है।

Delhi New CM Bengal Strategy: क्या केजरीवाल की तरह ममता बनर्जी को हराना आसान होगा?

ममता बनर्जी का कद अभी भी बंगाल की राजनीति में बेहद मजबूत है। उनका ग्रासरूट नेटवर्क बहुत ही प्रभावी है और उनकी जनसभाओं में जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती है।

ममता का जनाधार: ममता बनर्जी गरीबों,महिलाओं और मुस्लिम समुदाय के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी सरकार की लोक-लुभावन योजनाओं का सीधा असर जनता पर पड़ता है।

टीएमसी की रणनीति: ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ आक्रामक प्रचार का इस्तेमाल करती हैं और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करती हैं। केजरीवाल भी इसमें माहिर थे और इस बार वह इसमें गच्चा खा गए हैं। अब बीजेपी बंगाल में ममता की इस रणनीति का कैसे सामना करेगी, यह देखने वाली बात है।

गठबंधन की संभावना: अगर कांग्रेस और लेफ्ट ममता बनर्जी के साथ गठबंधन करते हैं, तो बीजेपी के लिए मुकाबला और मुश्किल हो सकता है। हालांकि, ममता का ट्रैक रिकॉर्ड देखने के बाद इसकी संभावना नहीं के बराबर लगती है। दूसरा, इसे उनकी कमजोरी का संकेत भी मान जा सकता है।

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