Delhi Pollution: जहरीली हवा से कराह रही दिल्ली, सो रही सरकार, चुनावी तैयारी में जुटा विपक्ष!
Delhi NCR Air Pollution: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) की हवा एक बार फिर 600 के पार AQI के साथ 'सीवियर प्लस' श्रेणी में पहुंच गई है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। खांसी, सांस की दिक्कत और आंखों में जलन जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम दिख रही है। सरकार अभी तक कुछ भी ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर जहरीली हवा में दम घोंट रहा है, तब प्रदूषण कम करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है?
वहीं दूसरी ओर, दिल्ली की प्रमुख विपक्षी दल आदमी पार्टी (AAP) और उसके तमाम प्रमुख चेहरे संजय सिंह, आतिशी, राघव चड्ढा, यहां तक कि पूर्व सीएम केजरीवाल तक इस भयावह जनसंकट पर चुप्पी साधे बैठे हैं। विपक्ष का यह मौन आश्चर्यजनक है और गहरी चिंता पैदा करता है। क्या सत्ता के खेल और राजनीतिक एजेंडे में जनता का स्वास्थ्य इतना गौण हो गया है कि वे त्राहिमाम करती जनता की आवाज़ बनने को तैयार नहीं हैं? आज जब केवल सामाजिक संगठन ही संघर्ष कर रहे हैं, तब राजनीतिक नेतृत्व की यह सामूहिक विफलता असहनीय है।

AQI में नहीं हो रहा है कोई सुधार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi AQI) में वायु प्रदूषण AQI 600 से अधिक होने के कारण 'सीवियर प्लस' श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य खतरे में है। खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। प्रदूषण के जानलेवा स्तर पर पहुँचने के बावजूद, प्रशासन ने अब तक स्कूलों में फिजिकल क्लासेस बंद करने या प्रदूषण नियंत्रण के सबसे सख्त उपाय ग्रेप-4 (GRAP-4) लागू करने जैसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस भयावह स्थिति के बीच, आज, 19 नवंबर 2025 को, प्रदूषण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होनी है। अब जनता की उम्मीदें केवल सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं कि वह बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और तत्काल सख्त कार्रवाई के लिए प्रशासन को निर्देश दे।
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रेखा गुप्ता सरकार प्रदूषण रोकने में फेल!
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो चुका है, AQI 600 के पार पहुंच गया है, लेकिन रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। गंभीर स्वास्थ्य संकट के बावजूद, सरकार कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।
स्कूलों को बंद करने या GRAP-4 लागू करने जैसे तत्काल निर्णय लेने के बजाय, राजनीतिक गलियारों में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हो रही है। इस जहरीली हवा में जब बच्चे और नागरिक दम घोंट रहे हैं, तब सरकार की निष्क्रियता और केवल बयानबाजी करना जन-स्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है। जनता को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा चाहिए।
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संजय सिंह और आतिशी का चौंकाने वाला मौन
जहां दिल्ली-एनसीआर जानलेवा प्रदूषण में घुट रहा है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके प्रमुख चेहरे इस भयावह जनसंकट पर चुप्पी साधे बैठे हैं। विपक्ष का यह मौन आश्चर्यजनक है और गहरी चिंता पैदा करता है। सांसद संजय सिंह, जो हर मुद्दे पर मुखर रहते हैं, दिल्ली को छोड़कर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं और लगातार यूपी यात्रा पर हैं। इसी तरह, दिल्ली की पूर्व सीएम और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी इस गंभीर संकट पर कुछ नहीं बोल रही हैं क्योंकि वह गोवा चुनाव की प्रभारी के रूप में राज्य से बाहर चुनावी रणनीति में जुटी हुई हैं।
केजरीवाल का पंजाब मोह, राघव चड्ढा 'लापता'
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल प्रदूषण के इस भीषण संकट के दौरान दिल्ली की राजनीति से पूरी तरह कट गए हैं। उनका सारा फोकस अब पंजाब की राजनीति पर है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदूषण को लेकर कोई सवाल या चिंता नहीं दिखती; वह केवल पंजाब सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करते हुए दिखाई देते हैं। इसी तरह, सांसद राघव चड्ढा तो पूरी तरह से राजनीति से बाहर हैं। वह इस वक्त कहाँ हैं, इसकी भी जानकारी नहीं मिल रही है, और उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कोई सक्रियता या दिल्ली के मुद्दों पर पोस्ट नहीं दिखता। ऐसे आपातकाल में प्रमुख नेताओं का यह लापता होना दिल्ली में AAP के नेतृत्व संकट को उजागर करता है।
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