Delhi AQI: दिल्ली-NCR में पूरे साल क्यों नहीं लागू हो सकता GRAP? सुप्रीम कोर्ट ने बताई बड़ी वजह
Delhi AQI News: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है। मंगलवार, 18 नवंबर की सुबह 6 बजे राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 341 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। अधिकांश इलाकों में सांस लेना अब भी मुश्किल बना हुआ है।
इसी बीच दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चिंताएं उठती रही हैं। इसके बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राजधानी में प्रदूषण से निपटने के लिए Graded Response Action Plan (GRAP) को साल भर लागू नहीं किया जा सकता है और समस्या का कोई समाधान नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण से प्रभावी मुकाबला केवल वैज्ञानिक, टिकाऊ और लॉन्ग टर्म रणनीति से ही संभव है, न कि सालभर आपातकालीन प्रतिबंधों से।
'GRAP को पूरे साल लागू करना संभव नहीं' SC
खराब हवा और बढ़ते प्रदुषण पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी थी कि दिल्ली एक "गैस चेंबर" में बदल चुकी है, इसलिए GRAP-1 के तहत जिन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है, उन्हें पूरे साल बंद रखा जाना चाहिए। लेकिन प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा-हमारे पास इस विषय पर विशेषज्ञता नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राजधानी को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा "हम सब कुछ बंद नहीं कर सकते... सभी गतिविधियां रोक देना समाधान नहीं है। दिल्ली को गैस चैंबर बताकर पूरे शहर को ठप नहीं कर सकते।"
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी थी कि दिल्ली का दम घुट रहा है और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। इसके जवाब में बेंच ने कहा कि प्रवासी मजदूरों और गरीबों के हित को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
कोर्ट ने कहा कि, GRAP वैज्ञानिक डेटा के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है। इसे पूरे साल लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि AQI लेवल के अनुसार GRAP के चरण एक्टिव होते हैं या नहीं यह विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा तय की गई वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
जीविका पर पड़ेगा भारी असर-SC ने जताई चिंता
कोर्ट ने यह भी कहा कि GRAP को पूरे वर्ष लागू करने से लाखों लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। पीठ ने कहा-दिल्ली में बड़ी आबादी विभिन्न गतिविधियों पर अपनी रोज़ी-रोटी के लिए निर्भर है। हर समय प्रतिबंध लगाने से उनकी आजीविका प्रभावित होगी। समाधान समस्या से बड़ा नहीं हो सकता। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण नियंत्रण की नीति ऐसी होनी चाहिए जो लोगों के जीवन और आजीविका दोनों को संतुलित करे।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त आदेश दिया कि दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार, पर्यावरण मंत्रालय और चारों राज्य-पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मिलकर एक संयुक्त और दीर्घकालिक योजना तैयार करनी चाहिए। अदालत ने कहा-यह समस्या अस्थायी उपायों से हल नहीं होगी। एक व्यापक, समन्वित, दीर्घकालिक एक्शन प्लान आवश्यक है।
पराली कम जलाने के बावजूद प्रदूषण कम क्यों नहीं? कोर्ट ने उठाया सवाल
न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार के हलफनामे में दावा किया गया है कि पराली जलाने के मामलों में कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। इसपर कोर्ट ने कहा कि यह साबित करता है कि समस्या केवल एक कारण तक सीमित नहीं है और व्यापक रूप से कई स्रोतों से मिलकर बनती है।
पीठ ने कहा कि पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई अंतरिम आदेश दिए गए, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकारें स्थाई समाधान पेश करें। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित एजेंसियां जल्द से जल्द दीर्घकालिक नीति तैयार कर कोर्ट को सूचित करें।












Click it and Unblock the Notifications