मुंडका अग्निकांड: रोते हुए सुनीता बोलीं- कोरोना में मेरा आदमी मर गया, अब मेरी बेटी भी चली गई

नई दिल्ली, 14 मई: दिल्ली के मुंडका में शुक्रवार को चार मंजिल बिल्डिंग में लगी आग 30 लोगों की मौत हो गई है। वहीं करीब एक दर्जन लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटनास्थल और अस्पतालों के बाहर इसी बिल्डिंग में काम करने वालों के परिजन भटक रहे हैं। करीब एक दर्जन परिजनों को अब तक ये नहीं पता चला है। लापता होने वालों में एक नाम सोनम भी है। सोनम की मां सुनीता अपनी बेटी को खोज रही हैं।

सोनम फैक्ट्री में एक साल से काम कर रही थी

सोनम फैक्ट्री में एक साल से काम कर रही थी

20 साल की सोनम का परिवार उनके इंतजार में और उनके जिंदा होने की आस में अस्पताल के कैंपस में कल रात से बैठा है। सोनम की मां सुनीता रो-रोकर लोगों से अपनी बेटी के बारे में पूछ रही है। मंगोलपुरी के संजय गांधी अस्पताल में सुनीता अपनी छोटी बेटी के साथ बीती रात से दर-दर भटक रही हैं। लेकिन उन्हें अपनी लापता बेटी के बारे में कोई खबर नहीं मिली। सोनम पिछले एक साल से इस कैमरा, एलईडी, वाईफाई बनाने वाली फैक्ट्री में काम कर रही थी।

तीसरी मंजिल पर फंसी थी सोनम

तीसरी मंजिल पर फंसी थी सोनम

सोनम की मां ने बताया कि, एक साल पहले कोविड से मेरे पति की मौत हो गई थी। अब मेरी बेटी भी चली गई। सोनम की मां सुनीता के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे और वो नम आखों से पूछती हैं कि " अब सोनम को कैसे देखूं ? कंपनी वाले उसका फोन नीचे ही जमा करा लेते थे। सोनम के भाई प्रिंस कहते हैं कि सोनम तीसरी मंजिल पर थी। उसके सारे दोस्त पहुंच गए, वो नहीं पहुंच पाई। ये नहीं पता चला कि वो कहां फंस गई। वो बीती शाम हादसे के वक्त 5 बजे मुंडका गए तो देखा वहां आग लगी थी, लेकिन रात 1 बजे तक आग नहीं बुझ पाई।

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    कई परिवारों के अपने हैं लापता

    कई परिवारों के अपने हैं लापता

    सोनम के परिवार की तरह तमाम परिजन अपने लोगों को ढूंढने या उनसे संबंधित सूचना के मिलने के इंतजार में घंटों अस्पताल में बैठे रहे। अभी तक भी कई लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं है। बिहार के रहने वाले रिंकू कुमार की 35 साल की भांजी जसोदा देवी का आग की घटना के 8 घंटे बाद भी कुछ भी पता नहीं चल सका है। रिंकू 3-4 अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं। वे अस्पताल और पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं।

    अग्निकांड के पीड़ितों में ज्यादातर महिलाएं

    अग्निकांड के पीड़ितों में ज्यादातर महिलाएं

    इसी तरह मुन्नी की 45 साल की ननद भारती उसी बिल्डिंग में नौकरी करती थी, जहां आग लगी। अब तक भारती का कुछ पता नहीं है। संजय गांधी हॉस्पिटल के बाहर ही सलमान अंसारी अपनी 35 साल की मामी मुसर्रत की फोटो लिए लोगों से पूछ रहे हैं, ‘क्या इनके बारे में कुछ पता चला?' मुसर्रत डेढ़ साल से उसी बिल्डिंग में बतौर हेल्पर काम कर रही थीं। भी तक सलमान की मामी का कोई पता नहीं चल पाया है। मुंडका की जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां ज्यादातर महिला कर्मचारी ही काम करती थीं और अग्निकांड के पीड़ितों में भी ज्यादातर महिलाएं ही हैं।

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