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Delhi MCD Result: जीत के बाद भी आप की चिंता बढ़ाएंगे ये आंकड़े तो भाजपा के सामने खड़ी है ये मुश्किल चुनौती

एमसीडी चुनाव में जीत के बाद भी आम आदमी पार्टी के वोट बैंक में गिरावट देखने को मिली है तो दूसरी तरफ 15 साल बाद एमसीडी से बाहर होने के बाद भाजपा की भविष्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की है। इस जीत से अरविंद केजरीवाल की पार्टी काफी उत्साहित नजर आ रही है। जिस तरह से 15 साल से एमसीडी में भारतीय जनता पार्टी का अधिपत्य था, उसेस आखिरकार आम आदमी पार्टी ने खत्म करने में सफलता हासिल की है। आप ने पहली बार एमसीडी में बहुमत का आंकड़ा हासिल किया है। आम आदमी पार्टी ने 134 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 104 और कांग्रेस ने सिर्फ 9 सीटों पर जीत दर्ज की है।

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आप के वोट बैंक में गिरावट

आप के वोट बैंक में गिरावट

इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट फीसदी 42.05, भाजपा का 39.09 फीसदी और कांग्रेस का वोट फीसदी 11.68 रहा। इस जीत के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने बड़ा संदेश दिया है। लोग पॉजिटिव राजनीति को पसंद कर रहे हैं, लोग अब नकारात्मक राजनीति को स्वीकार नहीं कर ररहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं हर किसी से कहता हूं कि अहंकार मत करना, बड़ी से बड़ी सत्ता गिर जाती है। कई पार्षद विधायक बने, मंत्री बने, किसी को अहंकार करने की जरूरत नहीं है, अहंकार करने वाले को ऊपर वाला माफ नहीं करता है।

केजरीवाल की अपील

केजरीवाल की अपील

जिस तरह से भारतयी जनता पार्टी डबल इंजन की सरकार का नारा हर राज्य में देती है कुछ उसी तरह का नारा आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में एमसीडी चुनाव में दिया। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के इस नारे को लोगों ने पसंद किया और पूरी तरह से दिल्ली की जिम्मेदारी आम आदमी पार्टी के हाथों में सौंपने का फैसला लिया। हालांकि आम आदमी पार्टी पहली बार एमसीडी में पूर्ण बहुमत के साथ आ रही है, लेकिन इसके साथ ही उसकी चिंता भी बढ़ रही है। जिस तरह से आम आदमी पार्टी का वोट शेयर कम हुआ है, उसने पार्टी की चिंता को जरूर बढ़ा दिया है।

आप के लिए मुश्किल

आप के लिए मुश्किल

वर्ष 2020 के चुनाव की बात करें तो आम आदमी पार्टी को 53.61 फीसदी वोट मिला था। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 38.52 फीसदी वोट मिला था। हालांकि आम आदमी पार्टी को इस चुनाव में सर्वाधिक वोट मिले हैं, लेकिन 2015 की तुलना में उसका वोट फीसदी जरूर कम हुआ है। 2015 में आम आदमी पार्टी को 54.3 फीसदी वोट मिला था, जबकि भाजपा को 32.3 फीसदी वोट मिला था। जबकि कांग्रेस को 9.7 फीसदी वोट मिला था। ऐसे में साफ तौर पर आम आदमी पार्टी के वोटो में गिरावट देखने को मिल रही है।

15 साल भाजपा की विदाई, पीएम का चेहरा भी नहीं आया काम

15 साल भाजपा की विदाई, पीएम का चेहरा भी नहीं आया काम

वहीं भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो जिस तरह से 15 साल बाद भाजपा की एमसीडी से विदाई हुई है, वह पार्टी के अलावा कमान की चिंता बढ़ाने वाली जरूर है। जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर हर चुनाव में मैदान में उतरती है, उसे अब देश की राजधानी में एमसीडी में बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा है। दिल्ली में पीएम मोदी का चेहरा काम नहीं आया। भाजपा ने कई ऐसे राज्यों में सत्ता हासिल की है, जहां उसे इसकी उम्मीद भी नहीं थी। त्रिपुरा तक में भाजपा ने सरकार बनाने में सफलता हासिल की, लेकिन दिल्ली में भाजपा का चुनाव दर चुनाव ग्राफ गिर रहा है।

दिल्ली में चेहरे की कमी भाजपा को खल रही

दिल्ली में चेहरे की कमी भाजपा को खल रही

वर्ष 2007 से भाजपा लगातार दिल्ली में एमसीडी में जीत दर्ज करती आ रही थी। लेकिन अब उसे एमसीडी से बाहर होना पड़ा है। वहीं विधानसभा की बात करें तो 1998 से भाजपा यहां की सरकार से बाहर है। वर्ष 2015 और 2020 में पार्टी ने सत्ता में वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन उसे 3 और 8 सीट पर ही जीत मिल सकी। दिल्ली में भाजपा की हार की बड़ी वजह किसी बड़े चेहरे का नहीं होना है। एक तरफ जहां आप अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के चेहरे पर लड़ रही है तो भाजपा के पास दिल्ली में मनोज तिवारी, हर्षवर्धन, विजय गोयल जैसे ही चेहरे हैं, जिन्हें दिल्ली के लोग अब अपनी पसंद नहीं मान रहे। किसी भी नेता को शीला दीक्षित जैसी लोकप्रियता और कामयाबी नहीं मिल सकी।

भविष्य की राह मुश्किल कर सकती है आप

भविष्य की राह मुश्किल कर सकती है आप

दिल्ली में आप ने 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा के खाते में सिर्फ 3 सीटें आई थी। वहीं 2020 में आप ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि भाजपा ने सिर्फ 8 सीटों पर जीत दर्ज की। ऐसे में जिस तरह से अब दिल्ली ने एमसीडी के जरिए दिल्ली में अपनी पकड़ को और मजबूत किया है, उसने निसंदेह 2025 विधानसभा चुनाव में भाजपा की राह को और भी मुश्किल कर दिया है। अहम बात यह है कि दिल्ली से बाहर निकलकर जिस तरह से आप ने पहले पंजाब में अपनी सरकार बनाई और अब एमसीडी में भाजपा के 15 साल के शासन को खत्म किया, वह आने वाले समय में भाजपा को ना सिर्फ दिल्ली बल्कि अन्य राज्यों में नुकसान पहुंचा सकती है।

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English summary
Delhi MCD Result 2022: Here is why BJP and AAP both have cause of concern after result
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