सिर पर बाल उगाने का धंधा, इस वजह से सैलून्स पर सख्त हुआ दिल्ली हाई कोर्ट

नई दिल्ली, 13 मई: कुकरमुत्तों की तरह उग आए हेयर ट्रांसप्लांट सैलून्स को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बहुत ही चिंता जाहिर की है और सरकार से कहा है कि इसके लिए उचित प्रोटोकॉल निर्धारित करे। दरअसल, राजधानी में एक शख्स की मौत हेयर ट्रांसप्लांट के बाद पैदा हुई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से हो गई थी। जिसका मामला अदालत में है। कोर्ट का साफ कहना है कि यह काम एक अनुभवी डॉक्टर को ही करना चाहिए, गैर-पेशेवर लोग अगर करते हैं तो लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्रनर से भी कहा है कि आगे ऐसी कोई घटना नहीं हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

सैलून्स में हेयर ट्रांसप्लांट पर दिल्ली हाई कोर्ट चिंतित

सैलून्स में हेयर ट्रांसप्लांट पर दिल्ली हाई कोर्ट चिंतित

सैलून्स में बाल प्रत्यारोपण के नाम पर चलने वाली दुकानों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। क्योंकि, यह काम अयोग्य लोगों के हाथों से बिना किसी मेडिकल सुपरविजन में हो रहा है, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ने लगी है। अदालत ने कहा है कि यह जरूरी है कि केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर इन प्रक्रियाओं पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए जाएं। हाई कोर्ट ने कहा है कि लोगों को यह बताना पड़ेगा कि यह प्रक्रिया खतरनाक हो सकती है और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल प्रोटोकॉल तैयार की जाए।

दिल्ली के रोहिणी में एक शख्स की हो गई मौत

दिल्ली के रोहिणी में एक शख्स की हो गई मौत

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता 35 साल के एक व्यक्ति की मौत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। आरोपों के मुताबिक दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक सैलून में हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में लापरवाही की वजह उस व्यक्ति की मौत हो गई थी। अदालत ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से कहा कि यह सुनिश्चित करें कि मेडिकल गोरखधंधे की ऐसी घटना दोबारा ना घटे। इस केस में पीड़ित ने इस प्रोसेड्योर के लिए 30,000 रुपये दिए थे। लेकिन, उसके सिर के ऊपरी हिस्से में दर्द शुरू हुआ और फिर चेहरा और कंधा सूज गया। आखिरकार अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

मौत का कारण- स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम

मौत का कारण- स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम

इलाज से संबंधित कागजातों के मुताबिक उस शख्स की स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम के चलते मौत हो गई, जिसमें सेप्टिक शॉक और फिर बाद में उसका मल्टी-ऑर्गन फेलियर हो गया। 11 मई को पास अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, 'तथ्य ये है कि टेक्निशियनों की सहायता से सैलून में हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी की जा रही है, जो कि बहुत चिंता का विषय है। क्योंकि, न तो वे पूरी तरह से योग्य हैं और न ही ऐसी कोई प्रक्रिया किसी प्रशिक्षित सर्जन या त्वचा विशेषज्ञ की देखरेख के बिना की जा सकती है।'

योग्य विशेषज्ञ ही करें या काम- दिल्ली हाई कोर्ट

योग्य विशेषज्ञ ही करें या काम- दिल्ली हाई कोर्ट

कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से यह भी सुनिश्चित कराने को कहा कि ऐसे सैलून्स के खिलाफ कार्रवाई हो, जो मौजूदा प्रोटकॉल और नियमों को ताक पर रखकर बिना मेडिकल सुपरविजन में अयोग्य लोगों के हाथों हेयर ट्रांसप्लांट से संबंधित इलाज या सौंदर्य से जुड़ी सर्जरी कर रहे हैं। उन्होंने नेशनल मेडिकल कमीशन और दिल्ली मेडिकल काउंसिल समेत संबंधित एजेंसियों से स्टैटस रिपोर्ट मांगते हुए इस बात पर जोर दिया कि क्योंकि हेयर ट्रांसप्लांट सौंदर्य सर्जरी है, इसलिए इसे योग्य त्वचा विशेषज्ञ या प्रशिक्षत सर्जनों के द्वारा ही मरीज की सहमति से किया जाए।

'यह स्वास्थ्य अपराध है'

'यह स्वास्थ्य अपराध है'

कोर्ट ने कहा है कि उसकी चिंता ये है कि बेकसूर मरीजों को कोई नुकसान न हो, जिन्हें यह पता नहीं है कि यह प्रक्रिया एक सक्षम पेशेवरों के हाथों होनी चाहिए, जिन्हें हेयर ट्रांसप्लांट की पूरी जानकारी है। कोर्ट ने कहा है कि मौजूदा केस न सिर्फ लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि पूरी तरह से स्वास्थ्य संबंधी अपराध है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। (दिल्ली हाई कोर्ट की तस्वीर के अलावा बाकी सांकेतिक)

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