राहुल गांधी की नागरिकता पर सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर आपका क्या रुख है? दिल्ली HC का केंद्र से सवाल
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाने वाली भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बख्रु और न्यायमूर्ति तुषार राव गेड़ेला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह अनुरोध किया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी, 2025 को निर्धारित की है। दरअसल, स्वामी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने ब्रिटिश नागरिकता स्वीकार की है। यह दावा 2019 में गृह मंत्रालय को लिखे गए पत्र के आधार पर किया गया है। पत्र में कहा गया है कि राहुल गांधी ने कथित तौर पर ब्रिटिश पासपोर्ट का उपयोग किया, जो भारतीय नागरिकता अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 9 का उल्लंघन करता है।

क्या है केंद्र का रुख?
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि मामले में नए वकील की नियुक्ति की जरूरत है। अदालत ने केंद्र का रुख स्पष्ट किए बिना आगे बढ़ने से इनकार कर दिया।
अन्य कानूनी पहलू
इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मामला:
कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दिल्ली हाईकोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक समान मामले की जानकारी दी। शिशिर का तर्क है कि स्वामी की याचिका समानांतर कार्यवाहियों का कारण बन सकती है। हालांकि, स्वामी का कहना है कि उनका मामला इलाहाबाद मामले से अलग है।
गृह मंत्रालय की निष्क्रियता:
स्वामी का आरोप है कि उन्होंने गृह मंत्रालय को कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सवाल और संभावनाएं
1. नागरिकता पर विवाद:
क्या राहुल गांधी ने वास्तव में विदेशी नागरिकता स्वीकार की है? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत, कोई भी व्यक्ति जो विदेशी नागरिकता स्वीकार करता है, वह भारतीय नागरिक नहीं रह सकता।
2. केंद्र की जिम्मेदारी:
क्या केंद्र सरकार इस मामले में कोई स्पष्ट रुख अपनाएगी, या इसे राजनीतिक विवाद मानते हुए टाल देगी?
अगला कदम
अदालत ने केंद्र सरकार से नए वकील नियुक्त करने के बाद मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
राहुल गांधी की नागरिकता पर फैसला आने से पहले, अदालत अन्य समानांतर मामलों को भी ध्यान में रखेगी।












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