दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, बच्चों के मिड डे मील खाने की एजेंसी करेगी जांच

नई दिल्ली, 14 जून: दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने राजधानी की सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की क्वालिटी की जांच के लिए एक एजेंसी को नियुक्त करेगी, ताकि स्कूलों में मिलने वाले भोजन के पोषण को जांच हो सके। यह एजेंसी स्कूलों के साथ-साथ किचन और गोदामों से रैंडम सैंपल भी लेगी। एजेंसी पके हुए भोजन और कच्चे माल दोनों के सैंपलों की नियमित अंतराल में जांच करेगी।

Mid Day Meals

दरअसल, इस कदम के पीछे दिल्ली सरकार का मकसद साफ है कि सरकार किसी भी कीमत पर बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) की जांच करने के लिए एक एजेंसी को नियुक्त करेगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भोजन गुणवत्ता और पोषण (nutritional ) के निर्धारित मानकों को पूरा करता है।

मिड डे मील या पीएम पोषण स्कीम, जिसके तहत बच्चों को उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए गर्म पका हुआ भोजन परोसा जाता है। इसमें कक्षा 1-8 और प्री प्राइमरी क्लास के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूली छात्रों दोनों को शामिल किया गया है। कोविड-19 महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने के दौरान सूखे राशन किट के वितरण के जरिए खाद्य सुरक्षा जारी रखा गया था।

शिक्षा निदेशालय (डीओई) के एक अधिकारी ने कहा, "सरकार एक एजेंसी किराए पर लेगी जो स्कूलों के साथ-साथ रसोई और गोदामों से रैंडम नमूने लेगी। पके हुए भोजन और कच्चे माल दोनों के नमूनों नियमित रूप से जांच किए जाएंगे।" आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी के 1200 से अधिक सरकारी स्कूलों में 8.24 लाख लाभार्थी हैं।

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