Nepal Border Dispute: भारत ही नहीं, चीन के साथ भी है नेपाल का सीमा विवाद! विदेश मंत्री के बयान से मची खलबली
Nepal border Dispute India China: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में सरकार की विदेश नीति और प्राथमिकताओं पर बड़ा बयान दिया। भारत और चीन के हालिया दौरों के बाद उन्होंने कहा कि सरकार फिलहाल बॉर्डर मैनेजमेंट, विदेशों में रह रहे नेपाली नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक कूटनीति पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है।
खानाल ने माना कि नेपाल का सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन के साथ भी कुछ इलाकों में सीमा विवाद है, जिनके समाधान के लिए बजट रखा गया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

भारत और चीन दौरे से दिखी संतुलित विदेश नीति
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 5 से 7 जून के बीच भारत और 14 से 17 जून के बीच चीन का दौरा किया। दोनों पड़ोसी देशों के इतने कम अंतराल में किए गए दौरे को नेपाल की बैलेंस्ड फॉरेन पॉलिसी का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नई सरकार बनने के बाद यह काठमांडू की एक अहम डिप्लोमैटिक उपलब्धि है। नेपाल एक तरफ भारत के साथ पारंपरिक रिश्तों को मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ भी सहयोग बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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भारत-नेपाल सीमा पर फिर शुरू हुआ सर्वे और निगरानी कार्य
संसद में खनाल ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर लंबे समय से रुका हुआ बॉर्डर पिलर पुनर्निर्माण और सीमा रिकॉर्डिंग का काम दोबारा शुरू हो गया है। दोनों देशों की तकनीकी टीमें जमीनी स्तर पर सर्वे और निरीक्षण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में मौजूद 'दसगजा' यानी नो-मैन्स-लैंड की निगरानी और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। नेपाल चाहता है कि सीमा से जुड़े मुद्दों को बातचीत और तकनीकी सहयोग के जरिए हल किया जाए ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा न हो।
चीन के साथ भी मौजूद हैं कुछ सीमा विवाद
खनाल ने संसद में स्वीकार किया कि नेपाल और चीन के बीच भी कुछ इलाकों में सीमा संबंधी विवाद मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इन मामलों के समाधान के लिए सरकार ने विशेष बजट का प्रावधान किया है। विदेश मंत्री के अनुसार चीन सीमा पर निगरानी भारत सीमा की तुलना में कम सक्रिय रहती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर के विवाद सामने आते रहे हैं। सरकार ने ऐसे मामलों की जांच, सर्वे और समाधान प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
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विदेशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री ने कहा कि विदेशों में रोजगार के लिए गए नेपाली नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्रमुख चिंता है। खासकर वे लोग जो बिना वैध लेबर परमिट के विदेश पहुंच जाते हैं, उनकी मदद करना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार कंपनियां मृत कर्मचारियों के शव को वापस भेजने में मदद नहीं करतीं, ऐसे मामलों में फॉरेन एम्प्लॉयमेंट बोर्ड सहायता दे सकता है। हालांकि अवैध तरीके से विदेश गए लोगों के मामलों में कानूनी और वित्तीय समस्याएं अधिक होती हैं।
आर्थिक कूटनीति और इमरजेंसी फंड पर सरकार का फोकस
खनाल ने घोषणा की कि विदेशों में संकट में फंसे नेपाली नागरिकों की मदद के लिए अगले वित्त वर्ष में 15 करोड़ नेपाली रुपये का इमरजेंसी फंड प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा सरकार आर्थिक कूटनीति को मजबूत करने के लिए देश-विशेष रणनीतियां तैयार कर रही है। नेपाल अब विदेशी निवेश (FDI), अनुदान और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करेगा। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान और यूक्रेन में फंसे नेपाली नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और सरकार इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।












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