दिल्ली सरकार की नई वाहन एग्रीगेटर्स नीति, वायु प्रदूषण पर बड़ा प्रहार, E-Bike टैक्सी को बढ़ावा
दिल्ली सरकार की अंतिम रूप दी जा रही एग्रीगेटर नीति में केवल इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स को बाइक टैक्सी के रूप में चलाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। जिसे प्रदूषण के खिलाफ बड़ा कदम माना जा रहा है।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी नेतृत्व वाली सरकार अब जल्द राज्य की वाहन एग्रीगेटर्स नीति 2021 को सख्ती से लागू करने जा रही है। इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। हालांकि ई बाइक राइडिंग सेवा प्रदाता कंपनियों इस पर ऐतराज जताया है, लेकिन दिल्ली के लिहाज से इसे प्रदूषण खत्म करने दिशा में केजरीवाल सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।
100% इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर नीति 2021 के अनुसार राज्य में अब सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने जा रही है। इस नीति के लागू होने पर ऑनलाइन या फिर डिजिटल रूप से सुविधा उपलब्ध कराने वाली ओला-उबर जैसी कंपनियों पर नकेल भी कसी जा सकेगी और यातायाता के लिए 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली यात्री व माल की परिवहन और वितरण सेवाएं प्रदान करने वाले एग्रीगेटर्स के लिए नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन जाएगा।
अधिक किराया वसूलने पर कार्रवाई
सरकार की नई नीति के तहत सवारियों से अधिक पैसा वसूलने पर भी कार्रवाई होगी। दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश गहलोत के एक बयान के मुताबिक दिल्ली सरकार ऐसी कंपनियों पर भी कार्रवाई करेगी जो सवारियों से निर्धारित किराए से अधिक पैसा वसूलती हैं और ग्राहकों के साथ ठीक से पेश नहीं आतीं। मंत्री गहलोत के मुताबिक दिल्ली जल्द ही शहर में यात्री व माल की परिवहन और वितरण सेवाएं प्रदान करने वाले एग्रीगेटर्स के लिए नीति लागू की जा रही है।
ग्रीन एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा
दिल्ली सरकार हाल ही में टैक्सी सेवाओं में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने की घोषणा की है। शहर वायु और ध्वनि प्रदूषण से मुक्त करने के लिए ये एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि इससे राइड-हेलिंग कंपनियां ओला या फिर उबर के मौजूदा वाहन चलन से बाहर हो सकते हैं। सरकार के सूत्रों की मानें तो प्रदूषण कम करने के लिए सरकार की नीति में इस तरह के प्रावधान किए जा रहे है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए नियम के लागू होने से बाये ईंधन पर दबाव कम होगा, जिससे प्रदूषण को कम करने के साथ ग्रीन एनर्जी पर चलने वाले वाहनों को तेजी से बढ़ावा मिलेगा।












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