बिहार के 10 मजदूरों के लिए मसीहा बना दिल्ली का किसान पप्पन सिंह, हवाई जहाज से भेजेगा घर
दिल्ली। लॉकडाउन में काम-धंधे बंद हो गए है, जिसके चलते प्रवासी मजदूरों के सामने विषम हालात हैं। ऐसे में उनके पास घर लौटने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। मजदूर भूखे-प्यासे सड़कों पर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर जा रहें। देशभर से मजदूरों की बदहाली की तस्वीरें भी सामने आ रही है। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इनके के लिए मसीहा बनकर सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं दिल्ली के पप्पन सिंह।

मशरूम की खेती करते है पप्पन सिंह
किसान पप्पन सिंह गहलोत, बाहरी दिल्ली स्थित बख्तावरपुर इलाके के तिगीपुर गांव में रहते है। पप्पन सिंह पिछले 27 सालों से अपने गांव में ही मशरूम की खेती करते है। ऐसे में इनके खेतों में काम करने के लिए पिछले 25 सालों बिहार से कुछ मजदूर भी आते हैं और जब इनका काम समाप्त हो जाता है तो वापस चले जाते हैं। ऐसे में कुछ मजदूरों के साथ पप्पन का ऐसा रिश्ता भी बन गया है, जिसे वह बयां नहीं कर पाते हैं।

10 मजदूरों को हवाई जहाज से भेजेंगे घर
पप्पन को मजदूरों के दर्द का अहसास हुआ तो उन्होंने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए 10 मजदूरों को बिहार भेजने का खर्च उठाने का फैसला किया, वह भी हवाई जहाज के जरिये। इन सभी मजदूरों को बिहार भेजने में पप्पन 50,000 रुपए से अधिक का खर्च कर रहे हैं। वह कहते हैं, बात पैसे की नहीं है। जब ये अपने घर-परिवार के बीच पहुंचेंगे, तो वह खुशी मैं भी महसूस करूंगा। पैसे हम रोज कमा सकते हैं, लेकिन इंसानियत कुछ होती है। मौका मिला तो इंसानियत का फर्ज निभा लिया।

लॉकडाउन के दौरान फंसे गए थे मजदूर
बताया जा रहा है कि हर साल की तरह इस बार भी बिहार से 10 मजदूर तिगीपुर आए, लेकिन लॉकडाउन के कारण फंस गए। ऐसे में उनके लिए बिहार पहुंच पाना मुश्किल हो गया, जबकि कोरोना संकट को देखते हुए सभी लोग जल्द से जल्द अपने घर जाना चाहते थे। वहीं, मजदूरों की इस चिंता के बारे जब पप्पन को पता चला तो उन्होंने सभी 10 मजदूरों की चिंता को तुरंत दूर कर दिया और उन्होंने खुद के खर्च से सभी मजदूरों के लिए 28 मई के लिए हवाई जहाज की टिकट का प्रबंध कर दिया व बख्तावरपुर के निगम पार्षद सुनीत चौहान की मदद से उनकी मंगलवार को स्क्रीनिंग भी कराकर यात्रा के लिए जरूरी औपचारिकताओं को पूरा कराया है।

परिजनों को नहीं हुआ विश्वास
मजदूरों ने कहा कि जब उन्होंने अपने स्वजनों को बताया कि वह हवाई जहाज से आ रहे हैं तो उन्हें सहज विश्वास ही नहीं हुआ। वहीं, पप्पन सिंह ने कहा कि वह अपने मजदूरों को तीन-तीन हजार रुपए बतौर बख्शीश भी दे रहे हैं और साथ ही यदि कोई भी दिक्कत इन्हें बिहार में होती है तो ये इन्हें वहां और भी पैसे भेज देंगे, क्योंकि पिछले 25 सालों में इन लोगों के साथ घर परिवार का रिश्ता बन गया है। बस अब मजदूरों को 28 मई को उड़ान भरनी है।












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