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Faiz-e-Elahi Masjid Demolition: फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन के दौरान पथराव, 10 लोग हिरासत में

Faiz-e-Elahi Masjid Demolition: राजधानी दिल्ली में तुर्कमान गेट के पास स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के नज़दीक 6 जनवरी की देर रात नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की।

यह तोड़फोड़ अभियान दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के एक दिन बाद शुरू किया गया, जिसमें शहरी विकास मंत्रालय, MCD और दिल्ली वक्फ बोर्ड से इस मामले में जवाब मांगा गया था।

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हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मामला "विचारणीय" है और संबंधित सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की है। इसी के बाद MCD ने मस्जिद के पास कथित अतिक्रमित भूमि पर देर रात बुलडोजर चलाया।

रात में चला बुलडोजर, बढ़ा तनाव

स्थानीय निवासियों के व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा गया कि बुलडोजर और अर्थ-मूवर मशीनें मस्जिद के कुछ हिस्सों को गिरा रही हैं। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। कुछ अन्य वीडियो में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और लोगों द्वारा पथराव किए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज किया और और अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। पुलिस कैमरे से उपद्रवियों की पहचान कर रही है।

पुलिस पर पथराव, कई जवान घायल

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस घटना में कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। डीसीपी निधिन वलसन ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा,रात के समय पुलिस पर पथराव किया गया। हालात को काबू में करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया। जैसे ही हमें सीसीटीवी, ग्राउंड फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग मिलेंगी, उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

मस्जिद सैयद फ़ैज़-ए-इलाही की प्रबंध समिति ने MCD के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस आदेश में MCD ने कहा था कि 0.195 एकड़ भूमि से बाहर बने सभी ढांचे अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं और उन्हें गिराया जाएगा। निगम का दावा है कि मस्जिद की प्रबंध समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड ने भूमि के स्वामित्व या वैध कब्जे से जुड़े दस्तावेज़ पेश नहीं किए। हालांकि, 0.195 एकड़ भूमि पर स्वयं मस्जिद स्थित है, जिसे लेकर फिलहाल विवाद नहीं है। विवाद उस अतिरिक्त भूमि को लेकर है, जहां कथित तौर पर अन्य ढांचे बने हुए हैं।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई की तैयारी

MCD का यह फैसला 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के आदेश के बाद आया था। उस आदेश में नागरिक निकाय और PWD को तुर्कमान गेट के पास रामलीला ग्राउंड क्षेत्र में करीब 38,940 वर्गफुट अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। इस अतिक्रमण में सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग क्षेत्र और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल बताए गए थे। यह आदेश 'सेव इंडिया फाउंडेशन' नामक संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया था।

वक्फ संपत्ति होने का दावा

मस्जिद की प्रबंध समिति का कहना है कि विवादित भूमि वक्फ संपत्ति है, जिसे वक्फ अधिनियम के तहत अधिसूचित किया गया है। समिति का तर्क है कि इस तरह के मामलों की सुनवाई का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है, न कि MCD को। समिति ने यह भी दावा किया है कि वह इस भूमि के उपयोग के बदले दिल्ली वक्फ बोर्ड को लीज़ रेंट का भुगतान करती आ रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि समिति की मुख्य आपत्ति उस कब्रिस्तान को लेकर है, जो इसी भूमि पर संचालित हो रहा है।

आगे क्या?

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है और 22 अप्रैल को इस मामले की अगली सुनवाई होगी। तब तक इस कार्रवाई को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में बहस तेज़ रहने की संभावना है। देर रात हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर दिल्ली में अतिक्रमण, धार्मिक स्थलों और कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं।

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