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Delhi Election 2025: दिल्ली के Middle class वोटर इस बार क्या करेंगे,AAP के साथ रहेंगे या BJP को देंगे मौका?

Delhi Election 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) और इसके सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल की सियासत भ्रष्टाचार के खिलाफ समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन से पैदा हुई है। वह आंदोलन पूरी तरह से मध्यम वर्ग का तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ आक्रोश से शुरू हुआ था। मध्यम वर्ग के उस आंदोलन को हवा देने में केजरीवाल ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन,राजनीति के मैदान में उतरने के बाद केजरीवाल ने दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी वालों और ऑटो-टैक्सी वाले जैसे निम्न वर्ग के लोगों को अपना मुख्य जनाधार बना लिया।

अलबत्ता, जिस तरह से 2013 में आप को पहली बार सरकार बनाने का मौका मिला और 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी को 70 सीटों में से क्रमश: 67 और 62 सीटें मिलीं, यह बिना मध्यम वर्ग के समर्थन से मुमकिन नहीं था। इसमें मुफ्त बिजली-पानी का भी बहुत बड़ा रोल रहा, जिसका मध्यम वर्ग बहुत बड़ा लाभार्थी रहा है। लेकिन, इस चुनाव में भी मध्यम वर्ग उसी तरह से आप के साथ खड़ा होगा, यह दावे के साथ कहना मुश्किल है।

delhi election 2025

Delhi Election 2025: मध्यम वर्ग का वोट इस बार किधर जाएगा?

अरविंद केजरीवाल ने इस बार खुद ही जिस तरह से मध्यम वर्ग के वोटरों को एक तरह से चेतावनी देने वाला दांव चला है, उससे यही संकेत मिलता है कि वह खुद इस बार इस वर्ग के वोट को लेकर आशंकित हैं। क्योंकि, वह अबतक इस वर्ग को फ्री बिजली-पानी और महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देकर ही निश्चिंत हो गए थे।

Delhi Election 2025: एंटी इंकंबेंसी की वजह से मध्यम वर्ग खोज सकता है विकल्प?

राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि केजरीवाल हवा का रुख भांपने में माहिर हैं। शायद केजरीवाल को आशंका है कि अगर 10-12 साल की एंटी-इंकंबेंसी की वजह से मध्यम वर्ग ने इस बार के विधानसभा चुनाव में विकल्प खोजा तो वह बीजेपी की ओर देख सकता है। क्योंकि, कांग्रेस अभी तक इस चुनाव में खुद ही असमंजस में दिख रही है। वह कभी तो आक्रामक हो जाती है और कभी उसके राहुल गांधी जैसे नेता भूल जाते हैं कि यह विधानसभा चुनाव है,लेकिन वह राष्ट्रीय मुद्दों में ही उलझे नजर आते हैं।

Delhi Election 2025: मध्यम वर्ग के वोटरों को जोड़े रखने के लिए आम आदमी पार्टी ने चला बड़ा दांव

जहां तक गरीब मतदाताओं की बात है तो वह आप सरकार की ओर से मुफ्त शिक्षा, मोहल्ला क्लिनिक, मुफ्त बिजली-पानी भर से जरूर संतुष्ट हो भी सकती है, लेकिन मध्यम वर्ग इससे आगे देख रहा है। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी ने मध्यम वर्ग को रिझाने के लिए चुनाव पासा फेंकने की कोशिश की है।

Delhi Election 2025: मध्यम वर्ग का शुभचिंतक बनने की कोशिश करके आप ने बीजेपी के खिलाफ अपनाई खास रणनीति

केजरीवाल ने मध्यम वर्ग के लिए सात-सूत्री घोषणापत्र जारी की है, जो बहुत ही चतुर रणनीति से तैयार की गई है। यह वादों का पिटारा नहीं है, बल्कि मांग की पूरी लिस्ट है, जिसके माध्यम से वह बीजेपी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सामने इस वर्ग को खड़ा करना चाह रहे हैं। एक तरह से केजरीवाल ने खुद को मध्यम वर्ग का शुभचिंतक बनने की कोशिश की है, ताकि अगर यह वर्ग भाजपा की ओर रुख करने की अगर सोच रहा है तो वह फिर से विचार करने को मजबूर हो जाए।

केजरीवाल ने टैक्स टेररिज्म की बात की है, मिडिल क्लास के लिए'पिस रहे हैं' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। इसके यही मायने निकलते हैं कि इस वर्ग में जो भी नाराजगी है उसका रुख बीजेपी और केंद्र सरकार की ओर कर दिया जाए।

ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर बहुत कुछ निर्भर है। अगर इसमें आयकर में कुछ रियायत की घोषणा होती है या फिर स्टैंडर्ड डिडक्शन को ही बढ़ाया जाता है या जीएसटी के स्लैब में बदलाव करके ही आम लोगों को मदद दी जाती है, तब इसका दिल्ली चुनाव पर भी निश्चित रूप से असर पड़ सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो देखने वाली बात है कि दिल्ली का मध्यम वर्ग इस बार 5 फरवरी को ईवीएम का बटन दबाते वक्त किसकी ओर झुकता है।

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