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Delhi Election 2025: दिल्‍ली के दंगल में कौनसी जाति के वोटरों का दबदबा, किन सीटों पर कौन किंगमेकर?

Delhi Election 2025: दिल्‍ली में दिसंबर की सर्दी में सियासत की गर्माहट है। वजह दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 है। 8वीं दिल्‍ली विधानसभा के चुनाव फरवरी 2025 में प्रस्‍तावित हैं। दिल्‍ली दंगल में जातीय व क्षेत्रीय समीकरण का अहम रोल है। कई ऐसी सीटें हैं, जिन पर जाति विशेष के वोटरों का कब्‍जा है। इनमें मुस्लिम, ब्राह्मण, दलित, जाट और पूर्वांचल मतदाता के शामिल हैं, जिनके हाथ में सत्‍ता की चाबी मानी जाती है।

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में आज 24 दिसंबर को कांग्रेस उम्‍मीदवारों की सूची जारी हो सकती है जबकि कल 25 दिसंबर को भाजपा प्रत्‍याशियों की पहली सूची जारी होने की उम्‍मीद है। जबकि आम आदमी पार्टी ने दिल्‍ली की 70 सीटों पर उम्‍मीदवार घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने पहली सूची में 21 उम्‍मीदवारों को टिकट दिया है। आप ही नहीं बल्कि बल्कि भाजपा और कांग्रेस दिल्‍ली दंगल में उम्‍मीदवार उतारने में जातीय समीकरण को साध रही हैं। दिल्‍ली में भाजपा की पहली और कांग्रेस की दूसरी सूची जारी होने से पहले जानते हैं दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में कौनसी सीटों पर किस जाति के मतदाताओं का दबदबा है?

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Delhi Election 2025 caste wise voters

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दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में कितने मतदाता हैं?

दिल्ली विधानसभा की सभी 70 विधानसभा सीटों पर कुल एक करोड़ 53 लाख 57 हजार 529 मतदाता हैं, जो पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले पांच लाख 71 हजार 147 बढ़े हैं। हालांकि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 की फाइनल वोटर लिस्‍ट 6 जनवरी को जारी होगी। चुनाव आयोग दिल्‍ली चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में जुटा है।

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दिल्‍ली में किस धर्म-जाति के कितने वोटर?

दिल्‍ली का धार्मिक व जातीय समीकरण मिनी इंडिया जैसा है। दिल्‍ली में सबसे ज्‍यादा 81 फीसदी मतदाता हिंदू समुदाय से हैं। 12 प्रतिशत मुस्लिम, 5 प्रतिशत सिख, एक-एक प्रतिशत मतदाता ईसाई और जैन हैं। जातीय और क्षेत्रीय आधार पर देखा जाए तो सबसे ज्‍यादा 25 फीसदी वोटर पूर्वांचली हैं। पूर्वांचली मतलब पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लोग, जो दिल्‍ली में रहने लगे। 22 प्रतिशत पंजाबी वोटर हैं। इनमें 10 फीसदी पंजाबी खत्री शामिल हैं। इनके अलावा दिल्‍ली में वैश्‍व मतदाता आठ व जाट वोटर करीब 18 प्रतिशत हैं। दिल्‍ली ब्राह्मण वोटरों की आबादी 10 फीसदी। दलित वोटर 17 फीसदी हैं। गुर्जर 3 फीसदी, यादव 2 फीसदी और राजपूत एक फीसदी व उत्तराखंडी वोटर करीब 6 फीसदी हैं।

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दिल्‍ली में मुस्लिम मतदाता वाली सीटें कौनसी हैं?

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में मुस्लिम प्रभाव सीटों के नतीजों पर भी सबकी नजर रहेगी। दिल्‍ली में करीब 12 फीसदी मुस्लिम मतदाता सीधे तौर पर 10 सीटों पर असर डालते हैं। मुस्लिम वोटरों के दबदबे वाले सीटों पर सीलमपुर, जंगपुरा, ओखला व मटिया महल जैसी सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर कभी कांग्रेस को एकतरफा वोट मिला करते थे, मगर पिछले दो चुनावों से कांग्रेस के वोट बैंक में आप सेंध मारने में सफल हो रही है।

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दिल्‍ली में ब्राह्मणों व दलितों का कौनसी सीटों पर प्रभाव?

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में करोलबाग, मोतीनगर, राजिंदर नगर ऐसी सीटें हैं, जहां दलित और ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव देखने को मिलता है। हालांकि साल 2015 और 2020 के चुनाव में इन सीटों पर आम आदमी पार्टी जीती है। इन सीटों पर करीब 10 फीसदी ब्राह्मण व 16 प्रतिशत से ज्‍यादा दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ब्राह्मणों का साथ भाजपा तो दलित वोट आम आदमी पार्टी के साथ।

दिल्‍ली में पूर्वांचल मतदाताओं का कौनसी सीटों पर प्रभाव?


पूर्वी यूपी, बिहार और झारखंड जैसी जगहों से काम-धंधे के सिलसिले में दिल्‍ली आए परिवार यहां के स्‍थायी निवासी बन गए। कई पीढ़ियों से दिल्‍ली में रह रहे हैं। ये पूर्वांचली मतदाता कह जाते हैं। इन 25 फीसदी पूर्वांचली वोटरों का दिल्‍ली 20 सीटों पर दबदबा है। इनमें गोकलपुर, मटियाला, द्वारका, नांगलोई, करावल नगर, जनकपुरी, त्रिलोकपुरी, बुराड़ी, उत्तम नगर, संगम विहार, जनकपुरी, त्रिलोकपुरी, किराड़ी, विकासपुरी व समयपुर बादली जैसी सीटें शामिल हैं।

दिल्‍ली चुनाव में जाटों के कितने वोटर?

दिल्‍ली में जाट मतदाताओं की संख्‍या तकरीबन 18 फीसदी मानी जाती है। खास बात है कि दिल्‍ली के 364 में से 225 गांवों में जाट वोटरों का दबदबा है। दिल्‍ली के ग्रामीण इलाकों की सीटों पर जाट वोटर ही हार-जीत तय करते हैं। साल 1996 से 1998 तक दिल्‍ली मुख्‍यमंत्री रहे स्व.साहेब सिंह वर्मा उस वक्‍त दिल्‍ली भाजपा के बड़े जाट चेहरा हुआ करते थे। अब साहेब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश सिंह वर्मा पश्चिम दिल्ली सीट से भाजपा सांसद हैं।

दिल्‍ली में दलित वोटरों वाली सीटें?

दिल्‍ली की 70 सीटों में से 12 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं। पूरे दिल्‍ली में दलित मतदाता करीब 17 प्रतिशत हैं। राजिंद्र नगर में 22 फीसदी, कस्तूरबा नगर में 11 फीसदी, मालवीय नगर में 10 फीसदी, आरके पुरम में 15, ग्रेटर कैलाश में 10 फीसदी, करोल बाग में 38 फीसदी, पटेल नगर में 23 फीसदी, मोती नगर में 11 फीसदी, दिल्ली कैंट में 16 फीसदी दलित मतदाता हैं।

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