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Delhi CM Rekha Gupta: कितनी परतों वाले सुरक्षा घेरे में रहती हैं दिल्ली CM? कितने कमांडो रहते हैं तैनात

Attack on Delhi CM Rekha Gupta: दिल्ली की सियासत एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवालों के घेरे में है। राजधानी के सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास पर जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुआ हमला किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है। दिलचस्प यह है कि यह पहली बार नहीं है, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री पर हमला हुआ हो।

इससे पहले अरविंद केजरीवाल पर तकरीबन 10 बार हमले हो चुके हैं कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्याही फेंकी गई, तो कभी चुनावी रैलियों में जूते-चप्पल और अंडे तक उछाले गए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली के मुख्यमंत्रियों पर बार-बार हमले क्यों हो जाते हैं? राजधानी जैसी संवेदनशील जगह पर सीएम की सुरक्षा व्यवस्था में बार-बार चूक कैसे हो जाती है? और उन्हें किस स्तर की सुरक्षा मिलती है?

Attack on Delhi CM Rekha Gupta

दिल्ली में सीएम असुरक्षित

रेखा गुप्ता से पहले जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब उन पर कई बार हमले हो चुके हैं। 2011 में लखनऊ में उन पर चप्पल फेंकी गई थी। 2013 में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्याही फेंकी गई। 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में तो हालात और बिगड़े, हैदराबाद में उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंका गया, वाराणसी में स्याही और अंडे फेंके गए, वहीं हरियाणा और दिल्ली में उन्हें थप्पड़ तक मार दिए गए। 2016 में ऑड-ईवन स्कीम की सफलता पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन पर स्याही फेंकी गई थी और उसी साल उन पर जूता भी फेंका गया। 2018 में दिल्ली सचिवालय के भीतर तो एक शख्स ने उन पर मिर्ची पाउडर तक फेंक दिया।

कैसे होती है दिल्ली सीएम की सुरक्षा?

दिल्ली के मुख्यमंत्री पर हुए हालिया हमले ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री को Z कैटेगरी सुरक्षा प्राप्त है, बावजूद इसके लगातार हमलों के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है और चूक कैसे हो जाती है।

Z कैटेगरी सुरक्षा में क्या-क्या शामिल है?

  • दिल्ली के सीएम को 20 से 25 कमांडो और जवान हर वक्त सुरक्षा कवच में घेरे रहते हैं।
  • मुख्यमंत्री का काफिला हमेशा एस्कॉर्ट व्हीकल, पायलट और फॉलो कार के साथ चलता है।
  • मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय पर स्थायी तौर पर दिल्ली पुलिस और विशेष सुरक्षा बल की तैनाती होती है।
  • पब्लिक मीटिंग, रोड शो और चुनावी रैलियों के दौरान सुरक्षा को और भी कड़ा कर दिया जाता है।
  • दिल्ली सीएम और अन्य राज्यो के सीएम की सुरक्षा में कितना अंतर

कितनी लेयर की होती है मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सुरक्षा?

दिल्ली के मुख्यमंत्री को सुरक्षा देने के लिए मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया गया है। इसका मकसद यह है कि किसी भी परिस्थिति में मुख्यमंत्री तक कोई संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु न पहुँच पाए।

1️⃣ पहली लेयर - इनर कॉर्डन

  • इस लेयर को सबसे अहम माना जाता है।
  • इसमें हमेशा 2 से 3 कमांडो मुख्यमंत्री के बिल्कुल करीब रहते हैं।
  • ये कमांडो क्लोज रेंज हथियार और वायरलेस सेट से लैस होते हैं।
  • चाहे मुख्यमंत्री घर पर हों, यात्रा पर हों या किसी सभा में, ये सुरक्षाकर्मी उनके साथ हर वक्त रहते हैं।

2️⃣ दूसरी लेयर - मिडिल कॉर्डन

  • इस घेरे में 4 से 6 सुरक्षाकर्मी थोड़ी दूरी पर तैनात रहते हैं।
  • इनका काम भीड़ को नियंत्रित करना और किसी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देना होता है।
  • ये जवान इनर कॉर्डन को सपोर्ट करते हैं और सुरक्षा की मजबूती बढ़ाते हैं।

3️⃣ तीसरी लेयर - आउटर कॉर्डन

  • मुख्यमंत्री जिस स्थान पर जाते हैं, वहां पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट की जिम्मेदारी होती है कि बाहरी स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • इसमें बैरिकेडिंग, फ्रिस्किंग और एंट्री प्वाइंट्स पर चेकिंग शामिल होती है।
  • यह लेयर भीड़ को दूर से नियंत्रित करने और किसी हमले को पहले ही नाकाम करने में मदद करती है।
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