दिल्ली के अस्पतालों की सुधरेगी हालत! CAG Health Audit के बाद विधानसभा का एक्शन, अधिकारियों को अल्टीमेटम

CAG Health Audit: दिल्ली में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने और जवाबदेही तय करने के लिए दिल्ली विधानसभा ने अब कमर कस ली है। गुरुवार (9 अप्रैल) को विधानसभा ने सभी संबंधित विभागों को एक कड़ा निर्देश जारी किया है, जिसमें कैग (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट और पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (PAC) की सिफारिशों पर तुरंत अमल करने को कहा गया है।

CAG Health Audit

31 जुलाई तक का 'डेडलाइन' अल्टीमेटम

दिल्ली विधानसभा ने साफ कर दिया है कि अब फाइलों में काम करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, सभी विभागों को 31 जुलाई तक 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) जमा करने का आदेश दिया गया है। इस रिपोर्ट में विभागों को यह बताना होगा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं। विभागों को 30 जून तक की स्थिति के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें हर सिफारिश पर हुई प्रगति और उसे पूरा करने की समय सीमा का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए।

CAG की रिपोर्ट में क्या था खास?

यह पूरा मामला पब्लिक एकाउंट्स कमेटी की उस पहली रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें 31 मार्च, 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिल्ली के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और सेवाओं के प्रबंधन की समीक्षा की गई थी। इस ऑडिट में स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों, बुनियादी ढांचे की स्थिति और मैनेजमेंट की खामियों को उजागर किया गया था। अब स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि ऑडिट का असली मकसद तभी पूरा होगा जब उन कमियों को दूर कर जनता को बेहतर इलाज मिले।

स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा सचिवालय ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को भी पत्र लिखा है। इसमें ऑडिट के निष्कर्षों पर समयबद्ध तरीके से जवाब देने और पीएसी की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई है। स्पीकर ने जोर देकर कहा है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से इलाज, शिक्षा और रोजगार के लिए आते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो समावेशी हों और बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करें।

दिल्ली आने वालों के लिए भी बेहतर स्वास्थ्य सेवा

स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने यह भी कहा कि दिल्ली सिर्फ यहां के रहने वालों के लिए नहीं, बल्कि देशभर से आने वाले लोगों के लिए भी स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र है। उन्होंने कहा कि रोजगार, पढ़ाई और इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग दिल्ली आते हैं, इसलिए स्वास्थ्य नीतियां सभी के लिए समान और सुलभ होनी चाहिए।

जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर

विधानसभा के इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही तय करना है। अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि ऑडिट की टिप्पणियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई में बदला जाए। सार्वजनिक अस्पतालों को मजबूत करना, बीमा कवरेज का विस्तार करना और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा) में निवेश करना दिल्ली सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

पब्लिक हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने पर जोर

विधानसभा ने साफ किया है कि आने वाले समय में

  • सरकारी अस्पतालों को मजबूत किया जाएगा
  • स्वास्थ्य बीमा का दायरा बढ़ाया जाएगा
  • और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा

इस फैसले के साथ ही दिल्ली में पहली बार स्वास्थ्य ऑडिट रिपोर्ट पर एक व्यवस्थित फॉलो-अप सिस्टम शुरू किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऑडिट में सामने आई कमियां सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित न रहें, बल्कि तय समय में उन्हें ठीक भी किया जाए। दिल्ली विधानसभा का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक बड़ा संकेत है। अब देखना होगा कि विभाग तय समयसीमा के भीतर कितनी तेजी से काम करते हैं और आम लोगों को इसका कितना फायदा मिलता है।

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