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Delhi Election: दिल्ली चुनाव के लिए BJP उम्मीदवारों के नामों का क्यों नहीं कर रही है ऐलान? क्यों हो रही देरी?

Delhi Assembly Election 2025: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आमतौर पर सभी राजनीतिक दलों में से सबसे पहले चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करती है। लेकिन दिल्ली में, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं और भाजपा ने अभी तक एक भी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान नहीं किया है।

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने सभी 70 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस पार्टी ने अब तक 21 नाम जारी किए हैं। दिल्ली में 25 साल से सत्ता से बाहर चल रही भाजपा ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भाजपा ने अब तक दिल्ली चुनावों के लिए नामों का ऐलान क्यों नहीं किया है?

Delhi Assembly Election 2025

70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल फरवरी में होने की उम्मीद है। भारत के चुनाव आयोग ने अभी तक तारीखों की घोषणा नहीं की है। दिल्ली में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 को खत्म हो रहा है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: भाजपा उम्मीदवारों के नाम में क्यों कर रही है देरी?

रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा राज्य इकाई में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। आगामी चुनावों में संगठनात्मक भूमिका वाले कई नेताओं को मैदान में उतारा जाएगा। आप और कांग्रेस द्वारा आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नाम जारी करने के बाद पार्टी की दिल्ली इकाई ने उम्मीदवार चयन और टिकट वितरण पर आंतरिक चर्चा पूरी कर ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की हर सीट के लिए तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम भाजपा संसदीय बोर्ड को भेजे जाएंगे, ताकि नामांकन को अंतिम रूप दिया जा सके। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देख रहे हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा की राज्य चुनाव समिति के गठन और कोर कमेटी के पुनर्गठन में देरी के कारण भाजपा की सूची का इंतजार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा अंतिम मंजूरी से पहले ये दो प्रमुख पैनल संभावित नामों की स्क्रीनिंग करते हैं।

कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी के उम्मीदवारों की सूची में देरी लोकसभा चुनाव संबंधी व्यस्तताओं के कारण हुई है। इसमें कोई पुनर्गठन योजनाओं का कारण नहीं है।

1998 से भाजपा दिल्ली में सत्ता से बाहर

आखिरी बार दिल्ली में भाजपा का मुख्यमंत्री 1998 में था, जब दिवंगत सुषमा स्वराज 52 दिनों के लिए शीर्ष पद पर रहीं। कांग्रेस की दिग्गज नेता दिवंगत शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

आप नेता अरविंद केजरीवाल दिसंबर 2013 में 49 दिनों के लिए पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहा। केजरीवाल 2015 में फिर से मुख्यमंत्री बने और 2020 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। इस साल सितंबर में उन्होंने पद छोड़ दिया और उनकी पार्टी की सहयोगी आतिशी को पदभार संभालने का रास्ता मिल गया।

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