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Delhi Assembly: दिल्ली विधानसभा में DTC से जुड़ी CAG रिपोर्ट पेश, किस हालात में है दिल्ली की परिवहन व्यवस्था?

Delhi Assembly: सोमवार (23 मार्च) से दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र की शुरुआत हो गई। 25 मार्च को बजट पेश किया जाना है। इससे पहले बजट सत्र के पहले दिन दिल्ली परिवहन निगम(DTC) से जुड़ी CAG की रिपोर्ट पेश किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि, फ्लीट में पुरानी बसों की संख्या 44.96 फीसदी हो गई है, जिससे उत्पादकता प्रभावित हुई और ब्रेकडाउन की घटनाएं बढ़ीं।

Delhi Assembly

एक के बाद एक CAG रिपोर्ट पेश

दरअसल, जब से बीजेपी की सरकार दिल्ली में बनी है उसके बाद से ही एक के बाद एक विभाग के CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर रही है। पहले शराब घोटले और मोहल्ला क्लिनिक से जुड़ी CAG रिपोर्ट के बाद अब दिल्ली परिवहन निगम(DTC) से जुड़ी CAG की रिपोर्ट पेश की गई।

DTC की जर्जर बसें लोगों के लिए बनी मुसिबत

पेश किए गए रिपोर्ट में बताया गया है कि, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की सबसे बड़ी समस्या पुरानी बसों की जर्जर स्थिति है। मार्च 2022 तक DTC के पास 3,937 बसें थीं, जबकि जरूरत 5,500 बसों की थी। इनमें से 1,770 बसें अपनी सेवा अवधि पूरी कर चुकी थीं, जिनमें लो-फ्लोर बसें 10 साल से अधिक पुरानी थीं और जल्द ही उन्हें बंद किया जाना था। रोजाना बसों की खराबी और ब्रेकडाउन के कारण यात्रियों को भारी परेशानी होती है।

2022 में केवल 300 नई बसें खरीदी गईं

वहीं इस रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि,DTC अपनी बसों का बेड़ा बढ़ाने में पूरी तरह विफल रहा है, जबकि इसके लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध था। 2007 में, दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि DTC के पास 11,000 बसें होनी चाहिए, लेकिन 2012 में दिल्ली कैबिनेट ने इसे घटाकर 5,500 बसों का लक्ष्य तय किया। इसके बावजूद, 2022 तक बसों की संख्या इस लक्ष्य से काफी कम थी।

2022 में केवल 300 नई बसें खरीदी गईं, जबकि ₹233 करोड़ रुपये का बजट विस्तार के लिए उपलब्ध था। DTC ने FAME-I योजना के तहत केंद्र सरकार की ₹49 करोड़ की सहायता राशि का भी उपयोग नहीं किया।

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मुफ्त बस यात्रा से आर्थिक बोझ

DTC की आर्थिक बदहाली का एक बड़ा कारण किराए में कोई बढ़ोतरी न होना है। 2009 से अब तक DTC बसों के किराए नहीं बढ़ाए गए, जबकि कई बार इसकी सिफारिश की गई। दिल्ली सरकार ने किराया बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी, जिससे DTC को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

इसके अलावा, सरकार द्वारा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शुरू करने से यह बोझ और बढ़ गया। 2015 से 2022 तक सरकार ने DTC को ₹13,381 करोड़ का अनुदान दिया, लेकिन इसके बावजूद ₹818 करोड़ की वित्तीय कमी बनी रही।

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खराब रूट प्लानिंग से हजारों करोड़ का घाटा

CAG रिपोर्ट में DTC की खराब रूट प्लानिंग पर गंभीर सवाल उठाए गए। DTC 814 निर्धारित बस रूटों में से केवल 468 रूटों पर ही परिचालन कर रहा था, यानी दिल्ली के आधे से भी कम रूटों को कवर किया गया।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि कोई भी बस रूट इतना लाभदायक नहीं था कि वह अपने संचालन का खर्च निकाल सके। नतीजा यह हुआ कि 2015 से 2022 के बीच परिचालन से हुए घाटे की कुल राशि ₹14,199 करोड़ तक पहुंच गई।

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