Debosmita Paul Murder Case: क्या नाना की संपत्ति बनी दिल्ली प्रोफेसर की हत्या की वजह? माता-पिता ने खोले राज!

Debosmita Paul Murder Case: दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. देबोस्मिता पॉल (49 वर्ष) की पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट्स में निर्मम हत्या कर दी गई। महज 5 दिन में पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्धमान से रामप्रसाद दास और बंश्री दास दंपति को गिरफ्तार कर लिया। उनके नाबालिग बेटे को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस का दावा है कि हत्या का मुख्य मकसद पश्चिम बंगाल में पैतृक संपत्ति का विवाद था।

लेकिन मृतका के माता-पिता इस थ्योरी से पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहे। Oneindia समेत मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और कई सवाल खड़े कर दिए।

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माता-पिता का बयान: 'समाधान से क्या फर्क पड़ेगा, हमारा बच्चा तो वापस नहीं आएगा'

शोक संतप्त माता-पिता ने जांच की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि वे जल्दबाजी में केस बंद करने के बजाय पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'समाधान से क्या फर्क पड़ेगा? हमारा बच्चा वापस नहीं आएगा।' परिवार चाहता है कि अधिकारियों से गहन और निष्पक्ष जांच हो।

पूर्व पति पर क्या कहा परिवार ने?

देबोस्मिता और उनके पति 2022 में अलग हो गए थे। पूर्व पति बेंगलुरु में रहते थे और बाद में 2024 में पुणे शिफ्ट हो गए। हत्या के बाद वे दिल्ली पहुंचे और पुलिस ने उनसे पूछताछ भी की।

परिवार का स्पष्ट कहना है कि जहां तक हमें पता है, अभी तक उनके खिलाफ कोई संदिग्ध सबूत सामने नहीं आया है। पुलिस कई लोगों से पूछताछ कर रही है, लेकिन पूर्व पति की संलिप्तता का कोई ठोस आधार परिवार को नहीं बताया गया।

संपत्ति विवाद थ्योरी पर माता-पिता ने क्या-क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स में सबसे बड़ा मकसद पश्चिम बंगाल की पैतृक संपत्ति बताया जा रहा है। गिरफ्तार दंपति उसी संपत्ति के किरायेदार थे और कथित तौर पर कब्जा या सस्ते में खरीदना चाहते थे। देबोस्मिता ने बिक्री से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली आकर हत्या की साजिश रची।

पुलिस ने हमें इस थ्योरी के बारे में कुछ नहीं बताया। विवादित संपत्ति देबोस्मिता के नाम पर नहीं, बल्कि उनकी मां के नाम पर है। यह संपत्ति देबोस्मिता के नाना (मां के पिता) की मृत्यु के बाद परिवार के पास आई। देबोस्मिता के पिता ने बताया कि मेरे ससुर के देहांत के बाद यह संपत्ति मुझे मिली। यह मेरी पत्नी के नाम पर है। किरायेदार (गिरफ्तार दंपति) केवल दो साल से वहां थे। परिवार ने कभी किसी किरायेदार को लंबे समय तक नहीं रखा। समझौते समय पर नवीनीकृत होते रहे और कभी कोई विवाद नहीं हुआ। परिवार को कभी ऐसा संकेत नहीं मिला कि किरायेदार संपत्ति पर मालिकाना हक जताने की कोशिश कर रहे थे। परिवार का कहना है कि वे इस थ्योरी की सच्चाई जांच पर छोड़ते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?

रामप्रसाद दास और बंश्री दास पश्चिम बंगाल के बर्धमान के रहने वाले हैं। वे देबोस्मिता की पैतृक संपत्ति के किरायेदार थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने नाबालिग बेटे को साथ लेकर संदेह कम करने की कोशिश की। फ्लैट में 'सौहार्दपूर्ण' तरीके से घुसे क्योंकि पीड़िता उन्हें जानती थीं। पुलिस ने चार राज्यों में छापेमारी कर दंपति को गिरफ्तार किया। अब उन्हें दिल्ली लाकर आगे पूछताछ होगी।

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