'अभी छोड़ दें दिल्ली', राजधानी की हवा बनी जहर, AQI पहुंचा सीजन के हाईएस्ट लेवल पर, डॉ. गुलेरिया ने दी चेतावनी
Delhi AQI Today: दिल्ली की हवा एक बार फिर लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गई है। रविवार को शहर की सांसें 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गईं, और हवा में जहरीले कणों की मात्रा तेजी से बढ़ने लगी। जैसे-जैसे सर्दी नजदीक आ रही है, राजधानी पर प्रदूषण का धुंधलका और गहराने लगा है।
कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार चला गया, जो साफ तौर पर 'गंभीर' स्थिति की ओर इशारा करता है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं, और इस हफ्ते दिल्ली को सीजन का पहला 'सीवियर एयर डे' झेलना पड़ सकता है।

कुछ इलाकों में 'गंभीर' स्तर की हवा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक शाम 4 बजे तक दिल्ली के 39 एक्टिव मॉनिटरिंग स्टेशन में से पांच जगहों पर AQI 'गंभीर' श्रेणी में था। इनमें बुराड़ी (404), चांदनी चौक (404), आरके पुरम (401), विवेक विहार (402) और वजीरपुर (418) शामिल हैं। बाकी 30 स्टेशनों पर हवा 'बेहद खराब' पाई गई।
ये भी पढ़ें: Aaj ka Mausam: सर्दियों ने दी दस्तक, किन राज्यों में अब भी बरस रहे बादल? कैसा है आज मौसम का मिजाज?
'यह साइलेंट किलर है'-डॉ. गुलेरिया
एम्स के पूर्व निदेशक और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि दिल्ली में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसी स्थिति है। उन्होंने चेताया कि राजधानी की हवा बेहद खतरनाक हो गई है, जो लोगों के फेफड़ों, दिल और दिमाग को नुकसान पहुंचा रही है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि जिन लोगों के फेफड़े कमजोर हैं, उन्हें शहर छोड़ देना चाहिए, और जो नहीं जा सकते, उन्हें मास्क पहनने और घर में एयर फिल्टर इस्तेमाल करने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि हर बार प्रदूषण बढ़ने पर सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों में 15-20% तक बढ़ोतरी होती है। अब युवा और स्वस्थ लोग भी खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्या झेल रहे हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि प्रदूषण खून में जाकर सूजन, ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ाता है। यह एक साइलेंट किलर है, जिसने 2021 में दुनियाभर में 80 लाख से ज्यादा लोगों की जान ली, COVID से भी ज्यादा।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (EWS) के अनुसार, दिल्ली की हवा रविवार और सोमवार को 'बेहद खराब' श्रेणी में रहेगी। मंगलवार को हालात और बिगड़ सकते हैं और AQI 'गंभीर' स्तर पर पहुंच सकता है। बुधवार तक हवा फिर 'बेहद खराब' श्रेणी में लौटने की संभावना है।
नवंबर में सबसे ज्यादा प्रदूषण
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़े बताते हैं कि हर साल 1 से 15 नवंबर के बीच हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रहती है। IIT-दिल्ली के 2019 के अध्ययन में भी कहा गया है कि प्रदूषण का पहला पीक अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह में आता है, जबकि दूसरा पीक दिसंबर के आखिर में दर्ज होता है।
हवा की दिशा और पराली का असर
स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि रविवार को हवा की रफ्तार करीब 10 किमी/घंटा रही, जिससे थोड़ी सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा कि दोपहर के समय हवा पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिशा में बह रही थी, जिससे पराली का धुआं दिल्ली तक पहुंचने की संभावना रही। 4 और 5 नवंबर को पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ी इलाकों में बारिश की संभावना है, लेकिन दिल्ली में सिर्फ बादल छाए रहेंगे। बारिश न होने से प्रदूषण में राहत की उम्मीद कम है।
एयर क्वालिटी में उतार-चढ़ाव
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली का AQI तेजी से बदला है - 30 अक्टूबर को 373, 31 अक्टूबर को 218, 1 नवंबर को 303 और 2 नवंबर को 366 दर्ज किया गया। डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुसार, रविवार को पराली जलने का योगदान केवल 3.5% रहा, जबकि शनिवार को यह 9% था। पिछले वर्षों में यह आंकड़ा नवंबर के पहले हफ्ते में 35% तक पहुंच जाता था। इस बार फसल कटाई में देरी के कारण पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं।
दिल्ली के PM2.5 में सबसे बड़ा योगदान ट्रांसपोर्ट सेक्टर (18.13%) का रहा, जबकि दिल्ली के रिहायशी इलाकों का हिस्सा 4.5% और झज्जर का 11.2% रहा। करीब 36.8% प्रदूषण बाहरी इलाकों से आने वाले अज्ञात स्रोतों से था। रविवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 30.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, 7 नवंबर के बाद न्यूनतम तापमान 15 डिग्री से नीचे जा सकता है।
ये भी पढ़ें: Rajasthan Ka Mausam: राजस्थान में अगले 4 दिन बारिश का अलर्ट, बिन मौसम की बरसात लेकर आई भारी तबाही!












Click it and Unblock the Notifications