Delhi का AQI खराब, बढ़ते वायु प्रदूषण से योग करेगा बचाव! जानें 5 कारण

Delhi AQI is bad yoga will save air pollution Know 5 reasons

दिवाली से पहले ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली 'हवा की गुणवत्ता में गिरावट' और 'बढ़ते वायु प्रदूषण' से जूझ रही है। इस बार, दिल्लीवासियों को बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का सामना करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सांस लेने में समस्या, अस्थमा, खांसी, सर्दी और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही है। वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए कई तरह के खतरे पैदा करता है, जिसके कारण अपनी सुरक्षा के लिए तत्काल सावधानी बरतने की जरूरत है।

पौष्टिक आहार और इनडोर फिटनेस व्यायाम करने से लेकर स्वास्थ्य जांच कराने तक, कोई भी अपने स्वास्थ्य पर खराब वायु गुणवत्ता के प्रभाव को कम कर सकता है। ऐसे में आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम में रेस्पिरेटरी/पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. शिवांशु राज गोयल बताते हैं कि कैसे योग की मदद से खराब होती वायु गुणवत्ता से खुद को बचाया जा सकता है।

Delhi Pollution

डॉ. गोयल ने कहा कि वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक योग है। योग श्वास और विश्राम तकनीकों पर विशेष ध्यान देता है और वायु प्रदूषण के पड़ने वाले प्रभावों का मुकाबला करने में मदद करता है।

जानें कौन-कौन से योग करेंगे मदद

प्राणायाम
नियंत्रित श्वास का अभ्यास, योग का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें विभिन्न श्वास व्यायाम शामिल हैं। यह श्वास व्यायाम फेफड़ों की क्षमता और दक्षता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। प्रदूषित वातावरण में हमारा श्वसन तंत्र लगातार तनाव में रहता है। भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम तकनीकें फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थों को अधिक प्रभावी ढंग से बाहर निकालने में मदद करती हैं।

इम्यून सिस्टम सपोर्ट
वायु प्रदूषण हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिससे हम श्वसन संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। योगाभ्यास, विशेष रूप से आसन और मैडिटेशन, इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देते हैं। नियमित रूप से योग करने से प्रदूषण संबंधी बीमारियों के प्रति शरीर की इम्यून सिस्टम बढ़ सकती है।

स्ट्रेस में कमी
वायु प्रदूषण के संपर्क में आना तनावपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यह अक्सर चिंता से जुड़ा होता है। मैडिटेशन और रिलैक्सेशन टेक्निक तनाव के स्तर को काफी कम कर सकती हैं। योग मानसिक शांति को बढ़ावा देकर व्यक्तियों को प्रदूषित वातावरण में रहने के मनोवैज्ञानिक प्रभाव से निपटने में मदद करता है।

विषहरण और सफाई
योग, षट्कर्म जैसी प्रथाओं के माध्यम से विषहरण को प्रोत्साहित करता है, जिसमें शरीर को साफ करने की तकनीक शामिल होती हैं। ये प्रथाएं प्रदूषित हवा, पानी और भोजन से जमा हुए विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद कर सकती हैं। स्वच्छ शरीर वायु प्रदूषण के नकारात्मक प्रभावों को बेहतर तरीके से कम कर सकता है।

श्वसन स्वास्थ्य में सुधार
कुछ योग आसन, जैसे भुजंगासन (कोबरा पोज) और मत्स्यासन (मछली पोज), श्वसन सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं, फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ा सकते हैं। डॉ. गोयल ने कहा कि यद्यपि योग, वायु प्रदूषण को खत्म नहीं कर सकता है। लेकिन, यह स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है।

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