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Delhi: IGI एयरपोर्ट पर CISF की बड़ी कार्रवाई, मानव तस्करी के शक में एक यात्री और एयरलाइंस के 4 कर्मचारी दबोचे

CISF Action Delhi Airport: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी दस्तावेज पर विदेश भेजने की कोशिश में पांच आरोपियों को पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों में से एयरलाइंस के 4 कर्मचारी शामिल है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ ने चार एयरलाइन कर्मचारियों और एक यात्री को 'मानव तस्करी' में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया है, जिसकी आधिकारिक जानकारी गुरुवार को जनसंपर्क अधिकारी सीआईएसएफ ने साझा की है।

Delhi airport human trafficking

सीआईएसएफ ने एक्स पर करते हुए बताया, "सतर्क सीआईएसएफ कर्मियों ने आईजीआई एयरपोर्ट पर एक यात्री के साथ मानव तस्करी में शामिल होने के संदेह में एआईएसएटीएस के 4 कर्मचारियों को पकड़ा है। जिनको दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है।"

जानकारी के अनुसार 27 दिसंबर को दोपहर करीब 1:15 बजे आईजीआई हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ निगरानी और खुफिया कर्मचारियों ने प्रस्थान गेट नंबर 5 के पास चेक-इन एरिया में बैठे एक यात्री की संदिग्ध गतिविधियों को देखा।

पीआरओ ने बताया कि यात्री की पहचान दिलजोत सिंह (भारतीय) के रूप में हुई, जिसे एयर इंडिया एयरलाइंस की उड़ान से दिल्ली से बर्मिंघम की यात्रा करनी थी। जांच के दौरान पता चला कि वह फ्लाइट पर नहीं चढ़ा। इससे सीआईएसएफ कर्मियों का संदेह गहरा हो गया, वहीं पूछताछ करने पर उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

फ्लाइट में नहीं बैठा तो शक गहराया

पीआरओ ने कहा, "उनके सामान की गहन जांच के बावजूद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिलने के बावजूद दिलजोत सिंह के फ्लाइट में नहीं चढ़ने ने शक गहरा कर दिया। जब उससे पूछा गया कि वो फ्लाइट में क्यों नहीं चढ़ा, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।"

शक के आधार पर उसकी पिछली गतिविधियों को सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से ट्रैक किया गया था। फुटेज की जांच की गई तो पता चला कि वह चेक इन काउंटर पर गया ही नहीं। यात्री न तो चेक-इन काउंटर पर गया और न ही इमिग्रेशन काउंटर पर वापस आया।

80 हजार में जाली दस्तावेज की हुई डील

उसके बदले एयर इंडिया में तैनात क्रू मेंबर रोहन वर्मा चेक इन की प्रक्रिया पूरी करने गया था। इसके बाद रोहन को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ ने वर्मा ने स्वीकार किया कि उसने अपने सहयोगी मोहम्मद जहांगीर-सीएसए, एआईएसएटीएस के निर्देशानुसार, उसने जाली दस्तावेजों के आधार पर दो अन्य यात्रियों के साथ सिंह की जांच की, जिसके लिए उसने 80,000 रुपए लिए थे।

पूछताछ करने पर जहांगीर ने कहा उसने स्वीकार किया कि उसने अपने सहयोगी को जाली दस्तावेजों पर यात्रियों के चेक-इन फॉर्म पूरा करने के लिए कहा था, क्योंकि महिपालपुर के निवासी राकेश नामक व्यक्ति ने उसे प्रति यात्री 40,000 रुपये की पेशकश की थी।

4 कर्मचारियों के साथ यात्री पुलिस के हवाले

मामले की जानकारी विजिलेंस के सीनियर मैनेजर ने सीआईएसएफ और एआईएसएटीएस के अधिकारियों को दी। बाद में, AISATS के दो अन्य कर्मचारियों, यश और अक्षय नारंग ने भी मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद उक्त यात्री सहित सभी संबंधित कर्मचारियों को मामले पर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया।

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