Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

 Delhi Air Pollution: बाहर ही नहीं, घर के भीतर भी दमघोंटू है हवा! दिल्ली में हम कितनी जहरीली सांस ले रहे हैं?

Delhi Air Pollution: दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ चुका है कि अब घर की चारदीवारी भी सुरक्षित नहीं रही। एक सप्ताह तक चले 'हिंदुस्तान टाइम्स' के एक विशेष फील्ड एक्सपेरिमेंट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली के स्कूल, अस्पताल और यहाँ तक कि हमारे घरों के अंदर की हवा भी उतनी ही जहरीली है जितनी कि बाहर की।

सालों से दिल्ली के लोग इस भरोसे में जी रहे थे कि खिड़की-दरवाजे बंद कर लेने से वे जहरीली हवा से बच जाएंगे। लेकिन हालिया रिपोर्ट चौंकाने वाले खुलासे करते हुए इस भ्रम को तोड़ दिया है।

delhi-air-pollution-how-toxic-indoor-air-quality

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे, मरीज और गर्भवती महिलाएं-घरों और स्कूलों के अंदर भी उतनी ही प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं जितनी बाहर की सड़कों पर है।

Indoor Air pollution Delhi: स्कूलों का हाल, क्लासरूम या पार्किंग लॉट?

स्कूल में की गई मॉनिटरिंग के नतीजे डराने वाले हैं। यहाँ बच्चों के क्लासरूम और स्कूल की पार्किंग की हवा में नाममात्र का ही फर्क पाया गया। स्कूल के गेट और बस पार्किंग के पास PM2.5 का स्तर 246µg/m³ से 502µg/m³ के बीच रहा।

क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और प्रिंसिपल के ऑफिस के भीतर भी यह स्तर 188µg/m³ से 404µg/m³ के बीच दर्ज किया गया। चिंता की बात यह है कि भारतीय मानकों के अनुसार सुरक्षित स्तर 60µg/m³ है, यानी स्कूल के अंदर की हवा सुरक्षित सीमा से 3 से 7 गुना अधिक जहरीली पाई गई। कॉरिडोर और खुले बरामदों में तो प्रदूषण का स्तर बाहर के बराबर ही था।

जहाँ इलाज के लिए आते हैं, वहां हवा ही 'बीमार' है

देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल AIIMS के भीतर भी हालात बेहतर नहीं हैं। कैंसर अस्पताल और 'मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक' जैसे संवेदनशील वार्डों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर मिली। कैंसर वार्ड जहां मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कम होती है, फिर भी वहां PM2.5 का स्तर 201µg/m³ से 431µg/m³ के बीच रहा। मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक में नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के इस वार्ड में प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 7 गुना अधिक है।

'प्रदूषण क्लीनिक' खुद प्रदूषण की चपेट में

आरएमएल (RML) अस्पताल में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए एक विशेष 'पॉल्यूशन क्लीनिक' बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस क्लीनिक के अंदर भी हवा का बेहद खराब स्तर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इलाज की जगह ही हवा जहरीली होगी, तो मरीजों की रिकवरी में देरी होना तय है।

Health Impact of Delhi Smog: क्या खिड़की-दरवाजे बंद करना काफी है?

पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी स्थित एक घर में किए गए प्रयोग से पता चला कि घर के अंदर की हवा तभी साफ हो सकती है जब एयर प्यूरीफायर लगातार चलता रहे। प्यूरीफायर के साथ: PM2.5 गिरकर 18µg/m³ (एकदम सुरक्षित) तक आ गया। प्यूरीफायर बंद होते ही खिड़की-दरवाजे बंद होने के बावजूद, मात्र 10 मिनट के भीतर प्रदूषण का स्तर 30µg/m³ से उछलकर 238µg/m³ पहुंच गया।

हवा में क्यों फैल रहा जहर?

सामुदायिक चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे घर 'एयरटाइट' (हवा बंद) नहीं होते। दरवाजों के नीचे की दरारों, खिड़कियों और वेंटिलेशन के जरिए बाहरी प्रदूषण तुरंत अंदर आ जाता है। इसके अलावा घर के अंदर इस्तेमाल होने वाली अगरबत्ती, खाना पकाने का धुआं और रूम फ्रेशनर स्थिति को और बिगाड़ देते हैं। दिल्ली में अब 'अंदर' और 'बाहर' की हवा के बीच की लकीर मिट चुकी है। जब तक बाहर की हवा में सुधार नहीं होता, तब तक स्वच्छ हवा केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जिनके पास महंगे एयर प्यूरीफायर और उन्हें 24 घंटे चलाने की क्षमता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+