Delhi Air Pollution: दिल्ली में फिर घुटा दम! खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण, क्या बारिश लाएगी राहत?

Delhi Air Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर डराने लगा है। गुरुवार, 12 फरवरी को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता (Air Quality) गिरकर फिर से 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार, 11 फरवरी को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 305 दर्ज किया गया। इस महीने में यह दूसरी बार है जब प्रदूषण का स्तर इस खतरनाक स्तर पर पहुंचा है।

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Delhi Aqi Poor: हवा की रफ्तार कम होने से बढ़ी मुसीबत

विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण हवा की गति में आई कमी है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ने के कारण स्थानीय स्तर पर हवाओं की रफ्तार कम हो गई, जिससे प्रदूषक कण (Pollutants) वातावरण में ही जमा हो गए और उनका फैलाव नहीं हो सका। इससे पहले 4 फरवरी को AQI 339 दर्ज किया गया था, जबकि पिछले कुछ दिनों से यह 'खराब' श्रेणी (200-300 के बीच) में बना हुआ था।

Delhi Weather: मौसम का मिजाज में बदलाव, गर्मी के अहसास के साथ तापमान में गिरावट

प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली के तापमान में भी उतार-चढ़ाव जारी है। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 27.5°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 13.2°C रहा, जो इस मौसम के सामान्य स्तर से 3 डिग्री ज्यादा है। मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि 12 से 14 फरवरी के बीच हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी रह सकती है, लेकिन आने वाले दिनों में चलने वाली तेज हवाएं राहत दे सकती हैं।

पश्चिमी विक्षोभ से बारिश की संभावना

स्काईमेट वेदर के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में एक के बाद एक तीन पश्चिमी विक्षोभ आने वाले हैं। पहला विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसका असर हिमालयी क्षेत्रों में दिख रहा है। दूसरा विक्षोभ 13 फरवरी के आसपास सक्रिय होगा। तीसरा और सबसे प्रभावशाली विक्षोभ 16-17 फरवरी के करीब आएगा, जिससे दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या गरज के साथ छींटें पड़ सकते हैं। इस बारिश से प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है।

प्रदूषण पर लगाम के लिए लागू होंगे CAQM के नए नियम

प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग (Mechanised Road Sweeping) के लिए नए तकनीकी और परिचालन मानक जारी किए हैं।

अध्ययन बताते हैं कि सड़क की धूल PM10 और PM2.5 के स्तर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से अलग-अलग क्षमता वाली मशीनों का उपयोग अनिवार्य होगा। भविष्य में शामिल की जाने वाली सभी नई स्वीपिंग मशीनें केवल CNG या इलेक्ट्रिक मॉडल की होंगी।

इन मशीनों में पानी के छिड़काव और धूल निस्पंदन (Filtration) की उन्नत व्यवस्था होगी। CPCB के अनुसार, 0-50 'अच्छा', 51-100 'संतोषजनक', 101-200 'मध्यम', 201-300 'खराब', 301-400 'बहुत खराब' और 401-500 'गंभीर' माना जाता है।

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