दिल्ली में 7वें दिन भी ऑक्सीजन की किल्लत, ऐसा है बड़े अस्पतालों का हाल
नई दिल्ली, अप्रैल 25: देशभर में रोजाना 3 लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वैसे घर बैठकर देखने पर ये आंकड़े महज एक नंबर लगते हैं, लेकिन असली मुसीबत मरीज और उनके तीमारदार झेल रहे हैं। एक ओर अस्पतालों में बेड नहीं खाली, अगर किसी तरह जिद्दोजहद के बाद भर्ती हो भी गए तो ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। राजधानी दिल्ली भी दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित है, जहां रविवार को सातवें दिन भी अस्पतालों ने ऑक्सीजन के लिए आपातकालीन मैसेज भेजे।

ऐसा है बड़े अस्पतालों का हाल
- पेंटामेड हॉस्पिटल ने रविवार को बताया कि उसके पास सिर्फ एक घंटे की ऑक्सीजन है, जबकि 50 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक उन्होंने दो वाहनों को बहादुरगढ़ और बवाना भेजा है, लेकिन वहां पर प्लांट के बाहर लंबी लाइन लगी हुई है।
- दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, में ऑक्सीजन सपोर्ट पर कम से कम 100 मरीज हैं। अस्पताल ने रविवार को कहा कि वो अब और मरीज नहीं भर्ती करेंगे अन्याथ दिक्कत हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक उनके पास सिर्फ दोपहर एक बजे तक का स्टॉक था। हालांकि बाद में राघव चड्ढा ने ट्वीट कर बताया कि ऑक्सीजन टैंकर जल्द पहुंचने वाला है।
- शनिवार को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल ने 24 घंटे में चार बार ऑक्सीजन की कमी की झंडी दिखाई। हालांकि बीच-बीच में सरकार सप्लाई करती रही।
- एलएनजेपी अस्पताल में भी बड़ी संख्या में मरीज भर्ती हुए हैं। वहां पर भी ऑक्सीजन की किल्लत थी, लेकिन रविवार को वक्त रहते टैंकर पहुंच गया।
- दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में शनिवार को ऑक्सीजन की कमी हुई थी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने सरकार से मदद मांगी, हालांकि उसके कुछ देर बाद टैंकर पहुंच गया। अस्पताल ने दावा किया था कि शुक्रवार-शनिवार की रात ऑक्सीजन की कमी से कम से कम 25 मरीजों की मौत हुई।
सरकार ने उठाए ये अहम कदम
- दिल्ली में पिछले हफ्ते ही लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया था, लेकिन केस कम नहीं हुए। जिसको देखते हुए केजरीवाल सरकार ने एक हफ्ते का लॉकडाउन बढ़ा दिया है।
- सीएम केजरीवाल के मुताबिक दिल्ली में 700 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन केंद्र ने अभी तक 480 टन ही आवंटित किया था। इसके बाद राज्य के अनुराध पर केंद्र ने 10 टन और बढ़ा दिया।
- ऑक्सीजन के प्रबंधन के लिए सरकार ने एक पोर्टल बनाया है। उत्पादक से लेकर अस्पताल तक सब को हर दो घंटे में अपनी ऑक्सीजन की स्थिति बतानी होगी।












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