CM केजरीवाल का आरोप- जानबूझकर कोर्ट की छुट्टियों में अध्यादेश लाई मोदी सरकार, विपक्ष के नेताओं से करेंगे बात
Delhi CM Arvind Kejriwal ने शनिवार को मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट की छुट्टियों के बीच जानबूझकर अध्यादेश लाया गया है।

दिल्ली में चल रहे ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार एक नया अध्यादेश लेकर आई। जिसके तहत उपराज्यपाल को दोबारा से पुराने अधिकार मिल गए हैं। इसको लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। साथ ही अध्यादेश को केंद्र की सोची-समझी साजिश करार दिया।
सीएम केजरीवाल ने कहा कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट छुट्टियों के लिए बंद हुआ, केंद्र ने अध्यादेश लाकर कोर्ट का फैसला पलट दिया। इन्होंने आदेश को पलटने के लिए पहले से अध्यादेश लाने की तैयारी कर ली थी।
सीएम ने आगे कहा कि आप घटनाओं का क्रम देखिए। सुप्रीम आदेश के बाद 3 दिन के लिए सेवा सचिव गायब हो जाते हैं। फिर चीफ सेक्रेटरी गायब होते हैं, जब 3 दिन बाद सिविल सर्विस बोर्ड की मीटिंग होती है, तब 2 दिन एलजी लगा देते हैं। ऐसे में साफ है कि ये लोग कोर्ट के बंद होने का इंतजार कर रहे थे।
केजरीवाल ने आगे कहा कि अध्यादेश लाकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही खत्म कर दिया। ये लोकतंत्र के साथ, माननीय सुप्रीम कोर्ट के साथ भद्दा मजाक नहीं तो और क्या है? ये अध्यादेश से सुप्रीम कोर्ट की महिमा को चैलेंज कर रहे हैं कि जो मर्जी जजमेंट दे दो, हम 2 मिनट में अध्यादेश लाकर उलट देंगे। वो कोर्ट खुलते ही इस अध्यादेश को चुनौती देंगे।
सीएम के मुताबिक दिल्ली की जनता ने 4 बार उन्हें प्रचंड बहुमत देकर चिल्ला-चिल्ला कर कहा कि उन्हें AAP सरकार चाहिए, लेकिन मोदी सरकार मानने को तैयार नहीं है। वो 2015 में नोटिफिकेशन लेकर आए और फिर 2021 में कानून आया। इससे हमारी पावर छीन ली। जब AAP सरकार ने स्कूल-अस्पताल बनाए तो झूठे मुकदमों में शिक्षा मंत्री-स्वास्थ्य मंत्री को जेल में डाल दिया। इस अध्यादेश से कामों की रफ्तार जरूर कम होगी, लेकिन वो इसे रुकने नहीं देंगे।
'दिल्ली में जीरो सीट जीतेगी बीजेपी'
उन्होंने कहा कि दिल्ली में महारैली होगी। लोगों जिस तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे लग रहा कि अगले साल दिल्ली में 7 लोकसभा सीट में से बीजेपी एक भी नहीं जीतेगी। सीएम ने कहा कि वो विपक्ष के नेताओं से बात करेंगे, ताकि जब राज्यसभा में अध्यादेश आए, तो उसे पास नहीं होने दिया जाए, क्योंकि ये लोकतंत्र विरोधी है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
कोर्ट ने कहा था कि जनता की चुनी गई सरकार को ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार होना चाहिए। ऐसे में सीएम केजरीवाल को शक्तियां मिल गई थीं। उसके बाद उन्होंने सेवा सचिव को बदलने का आदेश जारी किया, लेकिन एलजी ने उसे मंजूरी नहीं दी। अब ये अध्यादेश आने से शक्तियां एलजी के पास चली गईं।












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