CJI पर जूता फेंकने के प्रयास केस: वकील के घर AAP का जोरदार प्रदर्शन, कहा- 'संविधान का अपमान', BJP को घेरा
CJI Gavai Shoe Throwing Incident Update: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई पर जूता फेंकने के प्रयास की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार (7 अक्टूबर 2025) को AAP कार्यकर्ताओं ने जूता फेंकने का प्रयास करने वाले वकील राकेश किशोर के मयूर विहार स्थित घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। AAP कार्यकर्ताओं ने इसे 'दलित विरोधी मानसिकता' का प्रतीक बताते हुए BJP पर आरोप लगाया कि ऐसे तत्वों को पार्टी का संरक्षण मिला हुआ है।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए - 'CJI पर हमला, संविधान पर हमला!' और 'RSS मानसिकता बंद करो!'। आइए, विस्तार से समझते हैं इस घटना का पूरा प्रकरण...

CJI Gavai Shoe Throwing Incident: क्या है CJI पर जूता फेंकने का प्रकरण?
सोमवार (6 अक्टूबर 2025) सुबह सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में सुनवाई के दौरान एक 71 वर्षीय वकील ने CJI जस्टिस गवई की बेंच पर अपना जूता फेंकने की कोशिश की। घटना दोपहर 11:35 बजे हुई, जब CJI जस्टिस के. विनोद चंद्रन के साथ मेंशनिंग हियरिंग कर रहे थे। वकील राकेश किशोर ने जूता निकाला और CJI की ओर फेंकने की कोशिश की, लेकिन जूता बेंच तक नहीं पहुंचा। सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया और बाहर ले गए। वकील चिल्ला रहा था, 'सनातन का अपमान नहीं सहेगे।'
CJI गवई ने शांत रहते हुए कहा, 'इन बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। वकीलों, ध्यान भटकाओ मत, सुनवाई जारी रखें।' सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने वकील को तुरंत सस्पेंड कर दिया। दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन CJI के निर्देश पर कोई केस दर्ज नहीं किया। वकील को शाम तक रिहा कर दिया गया।
CJI Gavai Shoe Throwing Incident Reason: क्यों फेंका वकील ने CJI पर जूता? 'सनातन अपमान' का आरोप
वकील ने कहा कि CJI गवई के 16 सितंबर 2025 के फैसले ने 'सनातन धर्म' का अपमान किया। CJI ने मध्य प्रदेश के खजुराहो के जावरी मंदिर में क्षतिग्रस्त 7 फुट ऊंची भगवान विष्णु मूर्ति के पुनर्निर्माण की PIL खारिज करते हुए कहा था, 'ये पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है। देवता से ही कहो कि वो कुछ करे।' बेंच ने कहा कि मंदिर ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के अधीन है, और PIL में दखल नहीं।
ये टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जहां कुछ लोगों ने इसे 'हिंदू भावनाओं का अपमान' बताया। 18 सितंबर को CJI ने सफाई दी, 'मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। मेरा बयान ASI के अधिकार क्षेत्र के संदर्भ में था।' लेकिन वकील ने इसे नजरअंदाज कर सोमवार को कोर्ट में हंगामा किया।
Who Is Lawyer Rakesh Kishore: कौन है वो वकील, जिसने CJI पर जूता फेंका?
वकील का नाम राकेश किशोर (71 वर्ष) है, जो दिल्ली के मयूर विहार का निवासी है। वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के रजिस्टर्ड मेंबर हैं। पूछताछ में किशोर ने कहा, 'CJI के बयान से आहत था। सनातन का अपमान सहन नहीं। पछतावा नहीं।' उन्होंने कहा, 'मेरा नाम डॉ. राकेश किशोर है। मेरी जाति कौन बताएगा? शायद मैं भी दलित हूं। लेकिन CJI पहले सनातनी हिंदू थे, बाद में बौद्ध बने।' किशोर को BCI ने सस्पेंड कर दिया।
AAP का प्रदर्शन: 'दलित CJI पर हमला, BJP-RSS का षड्यंत्र'
AAP कार्यकर्ताओं ने मयूर विहार में किशोर के घर के बाहर धरना दिया। AAP नेता ने कहा, 'ये घटना CJI गवई का नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज और संविधान का अपमान है। RSS-BJP की मानसिकता से प्रेरित वकील को संरक्षण मिला।' प्रदर्शन में नारे लगे - 'जूता फेंकने वाले को सजा दो' और 'दलित CJI जिंदाबाद!'। AAP ने BJP पर हमला बोला कि ये 'मनुवादी सोच' का परिणाम है।
न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल
ये घटना सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को चुनौती देती है। CJI गवई की शांति ने सबको प्रभावित किया, लेकिन वकील किशोर का सस्पेंशन और प्रदर्शन राजनीतिक रंग ले चुके हैं। क्या ये दलित-हिंदू तनाव को भड़काएगा? आपकी राय? कमेंट्स में शेयर करें...
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