आतिशी 'भरत', मनीष सिसोदिया 'लक्ष्मण' तो केजरीवाल क्या AAP के 'राम'? दिल्ली की सियासत में रामायण के रंग!

AAP Transform into Ramayana: दिल्ली की राजनीति में हाल ही में जो हलचल मची है, उसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर रामायण की धुनें सुनाई देने लगी हैं। AAP के नेता खुद को रामायण के पात्रों से जोड़कर देख रहे हैं, जिससे जनता के साथ भावनात्मक और नैतिक जुड़ाव बनाया जा सके।

यह रणनीति पार्टी को एक सशक्त और नैतिक रूप से निर्देशित टीम के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है, जैसा कि रामायण में राम और उनके भाई दिखाए गए हैं। आतिशी खुद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का भरत और मनीष सिसोदिया भी खुद को लक्ष्मण बता रहे हैं। AAP की सियासत में रामायण का सियासी कनेक्शन....

AAP Ramayana Connection

आतिशी ने खुद को 'भरत' बताया

23 सितंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद, आतिशी मार्लेना ने खुद को पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल का भरत बताया। आतिशी ने सीएम कार्यालय में एक खाली कुर्सी छोड़ दी और खुद दूसरी कुर्सी पर बैठीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि जैसे राम के वनवास के दौरान भरत ने उनकी खड़ाऊं रखकर अयोध्या का शासन संभाला, वैसे ही वह भी दिल्ली की सीएम की कुर्सी को केजरीवाल के लिए सुरक्षित रखेंगी। उनका कहना था, "चार महीने बाद दिल्ली के लोग फिर से केजरीवाल को इस कुर्सी पर बिठाएंगे, तब तक ये कुर्सी उनका इंतजार करेगी।"

आतिशी का यह कदम उनकी निष्ठा और पार्टी में अरविंद केजरीवाल के प्रति उनके समर्थन को दर्शाता है। रामायण में भरत ने राम के प्रति जो त्याग और समर्पण दिखाया था, उसी भावना को आतिशी ने अपने राजनीतिक कदम में अपनाने का प्रयास किया है।

मनीष सिसोदिया बने 'लक्ष्मण'
दूसरी तरफ, मनीष सिसोदिया ने खुद को केजरीवाल का लक्ष्मण बताया है। सिसोदिया का कहना है कि उनका और केजरीवाल का रिश्ता राम और लक्ष्मण जैसा है। रामायण में लक्ष्मण ने हमेशा राम का साथ दिया और हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहे। सिसोदिया भी पार्टी के संकट के समय केजरीवाल के साथ खड़े रहे हैं, चाहे वह शिक्षा नीति का मसला हो या प्रशासनिक कामकाज का।

दिल्ली शराब नीति घोटाले में जब अरविंद केजरीवाल जांच एजेंसियों के निशाने पर आए, तब सिसोदिया ने उनका साथ नहीं छोड़ा। 530 दिन तिहाड़ जेल में बिताने के बाद, जब सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त को उन्हें जमानत दी, तो वह बाहर आए। उनके कुछ दिनों बाद ही 13 सितंबर 2024 को, केजरीवाल भी तिहाड़ से बाहर निकले। यह पूरे घटनाक्रम को राम-लक्ष्मण के अटूट भाईचारे और समर्थन के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल को 'राम' बताने का प्रयास
अगर आतिशी खुद को भरत और सिसोदिया खुद को लक्ष्मण बताते हैं, तो अरविंद केजरीवाल को 'राम' के रूप में पेश करना स्वाभाविक है। राम एक आदर्श नेता और न्यायप्रिय राजा के रूप में जाने जाते हैं। इसी तरह, केजरीवाल को आम आदमी पार्टी में एक नेतृत्वकारी और नैतिक व्यक्ति के रूप में देखा जाता है।

रामायण में राम ने अपने भाइयों के साथ जो आदर्श नेतृत्व और नैतिकता का प्रदर्शन किया, आम आदमी पार्टी भी उसी आदर्श का अनुसरण करने की कोशिश कर रही है। यह नरेटिव न केवल पार्टी के आंतरिक संरचना को मजबूत बनाता है, बल्कि जनता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश भेजता है कि पार्टी के नेता एक संयुक्त और नैतिक आधार पर काम कर रहे हैं।

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