Sanjeev Jha: दिल्ली के शिक्षकों से करवाई जाएगी कुत्तों की गिनती, सांसद संजीव झा के खुलासे ने मचाया हड़कंप
Sanjeev Jha: दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था, जो कभी अपने क्रांतिकारी बदलावों और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए देशभर में मिसाल पेश करती थी, आज एक नए प्रशासनिक विवाद के केंद्र में है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजीव झा ने वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि दिल्ली में शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय अब आवारा कुत्तों की गिनती जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में झोंका जा रहा है।
झा का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में जिन शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता था, आज उन्हें ऐसे सर्वे कार्यों में लगाया जा रहा है। ये न केवल उनके पेशेवर सम्मान के खिलाफ है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। यह मुद्दा अब सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।

आम आदमी के आरोपों पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए इन आरोपों को निराधार बताया था। साथ ही उन्होंने AAP को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर इस बात का कोई सबूत है तो पेश करो। उन्होंने आम आदमी पार्टी के इन दावों को हार की बौखलाहट बताया था। अब उनकी इस चुनौती का जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने सरकारी आर्डर की कॉपी और टीचर की लिस्ट की एक फोटो शेयर की है।
अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग बनाम ग्राउंड सर्वे: संजीव झा के तीखे सवाल
सांसद संजीव झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक लिस्ट शेयर करते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के शिक्षा कार्यालय से जारी उस आदेश का जिक्र किया, जिसमें स्कूल स्टाफ और शिक्षकों के नाम 'डॉग सेंसस' (कुत्तों की गणना) के लिए मांगे गए हैं।
संजीव झा के मुख्य आरोप:
प्राथमिकताओं में बदलाव: झा के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता अब शिक्षा से हटकर प्रशासनिक सर्वेक्षणों पर केंद्रित हो गई है।
समय की बर्बादी: शिक्षकों का कीमती समय बच्चों को पढ़ाने के बजाय फील्ड वर्क में बर्बाद किया जा रहा है।
सम्मान को ठेस: एक शिक्षक की भूमिका राष्ट्र निर्माता की होती है, न कि सड़कों पर पशुओं की गिनती करने वाले कर्मचारी की।
केजरीवाल मॉडल से तुलना और 'अधिकारी' तर्क पर हमला
झा ने दिल्ली के पुराने शिक्षा मॉडल की याद दिलाते हुए कहा कि केजरीवाल सरकार के दौरान "शिक्षा पहले" की नीति थी। उस समय शिक्षकों को वैश्विक स्तर का एक्स्पोजर दिया गया ताकि वे दिल्ली के सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट स्कूलों से बेहतर बना सकें।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार को इस जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए। अक्सर ऐसे विवादों में यह तर्क दिया जाता है कि फैसला स्थानीय अधिकारियों ने लिया और सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी। संजीव झा ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा विभाग से ऐसा कोई आदेश निकलता है, तो इसकी जवाबदेही सीधे तौर पर सत्ता में बैठे लोगों की है।
क्या होगा बच्चों की पढ़ाई पर असर?
AAP नेता का कहना है कि इस तरह के गैर-शैक्षणिक कार्य सीधे तौर पर क्लासरूम लर्निंग को प्रभावित करते हैं। जब शिक्षक स्कूल परिसर से बाहर सर्वे के कामों में व्यस्त होंगे, तो:
- कक्षाओं में नियमित पढ़ाई बाधित होगी।
- बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाएगा।
- शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आने की प्रबल संभावना है।












Click it and Unblock the Notifications