सीएम अरविंद केजरीवाल की बेल पर HC ने लगाई रोक पर आप ने जताई चिंता

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री औरआम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की कोर्ट ने एक बार फिर न्‍यायिक हिरासत बढ़ा दी है। वहीं आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत पर रोक लगाने के दिल्‍ली हाईकोर्ट के फैसले पर चिंता जताई है।

इसके साथ ही आप ने स्थगन आदेश के समय और प्रकृति को असामान्य प्रकृति पर सवाल उठाया है।आम आदमी पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और वकील संजीव नासियार ने गुरुवार को कहा हम चिंतित हैं, एक आम आदमी न्‍यायालय में न्याय की उम्मीद लेकर आता है। अगर एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को न्याय नहीं मिल रहा है, तो एक आम आदमी न्याय की उम्मीद कैसे कर सकता है? हमने अपील की है कि इस पर गौर किया जाना चाहिए।

arvind kejriwal

बता दें तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल की दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy 2021-22) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और उसके बाद वो तिहाड़ जेल में बंद चल रहे हैं। फिलहाल अरविंद केजरीवाल सीबीआई की न्‍यायिक हिरासत में हैं।

हाईकोर्ट ने क्‍या दिया है आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर 25 जून को केजरीवाल की जमानत पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन ने कहा कि निचली अदालत ने 20 जून को जमानत देते समय ईडी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर उचित रूप से विचार नहीं किया।

कोर्ट ने ये भी कहा निचली अदालत ने जमानत की सुनवाई के दौरान ईडी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। इससे यह चिंता पैदा हुई कि क्या केजरीवाल को जमानत देने में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

इससे पहले जस्टिस मनोज मिश्रा और एसवीएन भट्टी की सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ ने केजरीवाल की जमानत पर हाईकोर्ट के अंतरिम रोक पर टिप्पणी की। उन्होंने इसे असामान्य पाया कि अंतिम आदेश जारी किए बिना अंतरिम रोक लगा दी गई।

बेंच ने कहा "स्थगन के मामलों में फैसले सुरक्षित नहीं रखे जाते बल्कि मौके पर ही सुनाए जाते हैं। यहां जो हुआ वह असामान्य है। हम इसे (मामले को) अगले दिन सुनेंगे।"

आप की जांच की अपील

संजीव नासियार ने मामले की गहन जांच की मांग की और इस बात पर जोर दिया कि निचली अदालत के आदेशों को कानूनी सीमाओं के भीतर चुनौती दी जानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी मापदंडों का पालन किया जाना चाहिए।

नासियार ने कहा "हमने अपील की है कि इस पर गौर किया जाना चाहिए। यदि निचली अदालत के न्यायाधीश ने कोई आदेश दिया है, तो उसे कानूनी दायरे में चुनौती दी जानी चाहिए।"

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