'केंद सरकार ने दिया था दिल्ली के एक मंदिर को तोड़ने का आदेश', AAP ने दिखाया वो पत्र
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: पूरे देश में जहां एक तरफ दिल्ली के जहांगीरपुरी में एमसीडी के अतिक्रमण विरोध अभियान का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि राजस्थान के अलवर में 300 साल पुराने मंदिर को तोड़ने का विवाद सुर्खियों में आ गया। अलवर के राजगढ़ कस्बे में मंदिर को अतिक्रमण के तहत तोड़ा गया, जिसके बाद बीजेपी गहलोत सरकार पर हमलावर नजर आ रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी ने केंद्र सरकार की ओर से जारी एक लेटर को अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है, जिसमें दिल्ली के एक मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया है।

अलवर के राजगढ़ में 300 साल पुराने मंदिर को गिराने पर तेज हुए विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी ने केंद्र द्वारा जारी एक पत्र साझा किया है, जिसमें दिल्ली के श्रीनिवासपुरी इलाके में एक मंदिर को गिराने का आदेश दिया गया है। लेटर में बताया गया है कि धार्मिक संरचना बिना किसी प्राधिकरण के सरकारी भूमि पर बनाई गई थी। पत्र में आदेश दिया गया था कि 7 दिनों के भीतर जमीन खाली करनी होगी, ऐसा नहीं करने पर मंदिर को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
अलवर कलेक्टर ने बताई घटना
वहीं राजगढ़ के मंदिर को तोड़ने की कार्रवाई पर अलवर कलेक्टर के मुताबिक मंदिर को गिराने का फैसला आम सहमति बनने के बाद लिया गया। अलवर जिला कलेक्टर नकाते शिवप्रसाद मदन ने कहा कि सभी को व्यक्तिगत रूप से 6 अप्रैल को नोटिस दिया गया था और अतिक्रमण विरोधी अभियान से दो दिन पहले एक घोषणा की गई थी। बता दें कि अतिक्रमण विरोधी अभियान 17 अप्रैल और 18 अप्रैल को चलाया गया था। डीएम ने कहा कि कोई कानूनी ढांचा नहीं तोड़ा गया और विध्वंस अभियान के दौरान कोई विरोध नहीं हुआ।
सर्व सहमति से हटाया मंदिर
अलवर एडीएम सुनीता पंकज के मुताबिक राजगढ़ नगर पालिका ने पिछले साल सितंबर में प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसका क्रियान्वयन 17 अप्रैल को किया गया था। लोगों को पहले सूचित किया गया था कि इसे (मंदिर) हटा दिया जाएगा, तब से लेकर अब तक हमें स्थानीय लोगों की तरफ से किसी भी तरह का विरोध करने का आवेदन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 3 मंदिर थे 2 निजी और 1 नाले पर मंदिर बनाया गया था। प्रशासन ने लोगों से सर्वसम्मति से मूर्तियों को हटाया। नगर पालिका द्वारा लोगों की सर्व सहमति से निर्विवाद स्थल पर मंदिर बनेगा।












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