दस्यु सरगना ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल ने लौटाया सपा का टिकट, इस सीट से चुनाव लड़ने से किया इनकार
दस्यु सरगना ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल ने लौटाया सपा का टिकट, इस सीट से चुनाव लड़ने से किया इनकार
चित्रकूट, 05 फरवरी: आतंक का पर्याय रहे दस्यु सम्राट ददुआ के बेटे और पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। दरअसल, समाजवादी पार्टी ने वीर सिंह पटेल को चित्रकूट जिले के मानिकपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन वीर सिंह पटेल शुक्रवार को लखनऊ सपा कार्यालय पहुंचे और चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया।

कौन हैं वीर सिंह पटेल
वीर सिंह पटेल, आतंक का पर्याय रहे दस्यु सम्राट ददुआ के बेटे है। 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चित्रकूट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज कराई थी। लेकिन 2017 के चुनाव में वीर सिंह पटेल को हार का सामना करना था। वीर सिंह पटेल ने अपने पिता ददुआ के जिंदगी में ही सियासत में कदम रख दिया था और चित्रकूट से निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। 90 के दशक में वीर सिंह पटेल के पिता ददुआ का आतंक था।

गरीबों के लिए ददुआ एक मसीहा था
चित्रकूट के रैपुरा थाना क्षेत्र के देवकली गांव में पैदा हुआ ददुआ के पिता का नाम राम प्यारे पटेल था। ददुआ के पिता को कुछ सामांती लोगों ने गांव में नगा करके घुमाया और फिर हत्या कर दी थी। इसी एक घटना ने शिवकुमार पटेल को जिंदगी भर के लिए ददुआ के रूप में बदल डाला। लेकिन गरीबों के लिए ददुआ एक मसीहा बन गया था। शोषित और वंचित समाज में उसकी इमेज रॉबिनहुड की रही।

मानिकपुर सीट से सपा ने दिया था वीर सिंह पटेल को टिकट
ददुआ को मरे हुए 14 साल गुजर गए हैं, लेकिन चित्रकूट और बांदा इलाके में आज भी उसके नाम पर सियासत खत्म नहीं हो सकी। ददुआ भले ही डकैत रहा हो, लेकिन बुंदेलखंड के कुर्मी समाज में उसकी छवि का असर था। इसी समीकरण को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को मानिकपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया था। उन्होंने इस सीट से लड़ने से इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि उनकी तैयारी सदर सीट से थी।

तैयारी चित्रकूट सीट पर थी
वीर सिंह पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने चित्रकूट सदर विधानसभा सीट से आवेदन किया था लेकिन पार्टी ने उन्हें मानिकपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। उनकी तैयारी चित्रकूट विधानसभा सीट को लेकर थी। मानिकपुर विधानसभा सीट में संगठन भी मजबूत नहीं है। वह पार्टी के साथ हैं, पार्टी जिसे भी टिकट देगी, वे उसका पूरा साथ देंगे। लेकिन वह खुद मानिकपुर सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।












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