Fake currency: बूढ़े ससुर को चढ़ी अमीर बनने की सनक तो छिंदवाड़ा में दामाद छापने लगा नकली नोट, फिर ऐसे खुली पोल
Fake currency: 'कब्र में लटके पैर, तो फिर बोलों कैसा बैर' इस मुहावरे को चरितार्थ करते मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के 70 साल के बुजुर्ग की करतूत सामने आयी हैं। उम्र के आखिरी पड़ाव में उसे अमीर बनने की ऐसी सनक चढ़ी कि उसने काले कारनामे के लिए अपनी दामाद को बैसाखी बना लिया।
शहर के आशीर्वाद नगर में रहने वाले मोरेश्वर धकाते को कल तक लोग बड़ा ईमानदार और नेक दिल इंसान समझते थे। बेटी के हाथ भी पीले किए लोगों ने सोचा कि होने वाला दामाद परिवार-रिश्तेदारों की शान बनेगा। लेकिन एक झटके में ससुर-दामाद की इस जोड़ी ने दोनों का असली चेहरा सामने आ गया।
दरअसल बुढ़ापे में मोरेश्वर के सिर रईस बनने का भूत सवार हो गया। घर में 'खाली दिमाग शैतान का घर..' कुछ ऐसी ही स्थिति बनी। एक दिन अपनी बिटियां के घर पहुंचे मोरेश्वर ने अपने नाती के स्कूल के प्रोजेक्ट के नकली नोट का प्रिंट आउट निकलते देख लिया। वापस घर लौटा तो उसे तब तक नींद नहीं आई, जब तक हूं-बहू असली जैसे दिखने वाले नकली नोट प्रिंट करवाना शुरू नहीं कर दिया।

इसके लिए उसने अपने दामाद का सहारा लिया। दोनों मिलकर घर में हर रोज 500 सौ और 100 रुपये के नोट छापने लगे। इस तरह उन्होंने कई हजार रुपये के नोट छाप लिए। फिर इनको मार्केट में चलाने की जिम्मेदारी बूढ़े ससुर ने ली। उसे लगा कि बुढ़ापे देख उस पर कोई शक नहीं करेगा। लेकिन वह भूल गया कि हर जुर्म अपना कही न कही सबूत छोड़ ही देता हैं।
पांढुर्ना के थाना इंचार्ज राकेश सिंह बघेल ने बताया कि आरोपी मोरेश्वर धकाते एक ही मार्केट में अलग-अलग दुकानों पर पहुंचकर पांच हजार रुपये तक अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा रहा था। एक दो जगह वह सफल भी हो गया। इसके बदले वह दुकानदार को पांच सौ रुपये एक्स्ट्रा दे रहा था। इसी तरह जब वह एक ज्वेलर्स शॉप पर पहुंचा तो नोट लेते ही दुकानदार को शक हुआ दुकानदार ने इंटरनेट काम न करने का बहाना बताकर मोरेश्वर से कहा कि एक घंटे बाद रकम ट्रांसफर हो जाएगी। दुकानदार ने दोबारा जब नोट चेक करवाए तो मोरेश्वर की करतूत सामने आ गई। पुलिस ने उसके साथ दामाद को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की, दोनों ने अपना जुर्म कबूल लिया। आरोपियों के कब्जे से लगभग 30 हजार रूपये के नकली नोट बरामद किए हैं।












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