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छत्तीसगढ़ सरकार की गौमूत्र खरीदी योजना ने गाड़े झंडे, लांच होते ही हुई 2306 लीटर खरीदी

छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई हरेली पर्व से शुरू हुई गौमूत्र खरीदी योजना ने पहले ही दिन सफलता का रिकॉर्ड कायम कर लिया है।

रायपुर 29 जुलाई। छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई हरेली पर्व से शुरू हुई गौमूत्र खरीदी योजना ने पहले ही दिन सफलता का रिकॉर्ड कायम कर लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक योजना शुरू होने के प्रथम दिन 2306 लीटर गौ-मूत्र क्रय किया गया। सबसे अधिक 307 लीटर गौ-मूत्र की खरीदी कबीरधाम जिले में हुई। बालोद जिले में पहले दिन 287 लीटर और महासमुंद जिले में 184 लीटर गौमूत्र की खरीदी हुई।

छत्तीसगढ़ में 4 रुपए लीटर की दर से की गौमूत्र खरीदी

छत्तीसगढ़ में 4 रुपए लीटर की दर से की गौमूत्र खरीदी

छत्तीसगढ़ में 4 रुपए लीटर की दर से गौमूत्र खरीदी की शुरुआत अभी केवल 63 गांवों के गौठानों में हुई है। आने वाले समय में राज्य के सभी गौठानों में इसकी खरीदी होने लगेगी। इसके लिए जरुरी तैयारियों के साथ-साथ गौठान समितियों के सदस्यों और महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को गौमूत्र की खरीदी से लेकर उससे जैविक कीटनाशक ,जीवामृत-ग्रोथ प्रमोटर बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है ।

भूपेश बघेल खुद बने थे हितग्राही

भूपेश बघेल खुद बने थे हितग्राही

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में गोबर के बाद अब गौ मूत्र खरीदी का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देकर अनाज में विषैलेपन में कमी लाकर खेती की लागत को कम करना है। प्रदेश में गौमूत्र खरीदी योजना के पहले हितग्राही सीएम भूपेश बघेल खुद बने थे । गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हरेली तिहार के मौके पर 5 लीटर गौ-मूत्र, चंदखुरी की निधि स्व-सहायता समूह को 20 रुपये में बेचकर राज्य के पहले विक्रेता भी बने थे

गोधन न्याय योजना के माध्यम से खरीदी

गोधन न्याय योजना के माध्यम से खरीदी

छत्तीसगढ़ देश का पहला प्रदेश है, जो पशुपालक ग्रामीणों से 2 रूपए किलो में गोबर खरीदी के बाद अब 4 रूपए लीटर में गौमूत्र की खरीदी कर रहा है। इस पहल से छत्तीसगढ़ राज्य में पशुपालकों की आय में बढ़ोत्तरी और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। गोबर की खरीदी और इससे जैविक खाद बनाये जाने से जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना की शुरुआत 2 साल पूर्व 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से ही हुई थी। इसके माध्यम से गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों से गोबर कर बड़े स्तर पर जैविक खाद का निर्माण और उसका खेती में इस्तेमाल किया जा रहा है। गौमूत्र से जैविक कीटनाशक तैयार करके किसानों को 50 रुपये लीटर में मुहैया कराया जाएगा।

बस्तर जिले के 7 गौठानों में खरीदी

बस्तर जिले के 7 गौठानों में खरीदी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बस्तर जिले के सबसे अधिक 7 गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी की जा रही है, जबकि राजनादगांव और रायपुर जिले के 3-3 गौठनों में गौमूत्र खरीदा जा रहा है, बाकी जिलों के 2-2 गौठानों में गौमूत्र की खरीदी शुरु की गई है। पहले दिन 28 जुलाई को कोरिया जिले में 110 लीटर, बलरामपुर जिले में 45 लीटर, सूरजपुर में 37 लीटर, सरगुजा में 163 लीटर, जशपुर में 24 लीटर, रायगढ़ में 49 लीटर, कोरबा में 82 लीटर, जांजगीर-चांपा में 36 लीटर, बिलासपुर में 39 लीटर, मुंगेली में 52 लीटर , गौरेला -पेंड्रा- मरवाही जिले में 15 लीटर गोमूत्र की खरीदी की गई है ।इसी प्रकार 28 जुलाई को कबीरधाम जिले में सर्वाधिक 307 लीटर, राजनादगांव में 47 बेमेतरा में 85, दुर्ग में 52 ,बालोद जिले में 207, बलौदा- बाजार में 55, रायपुर में 64, गरियाबंद में महासमुंद में 184, धमतरी में 12, कांकेर जिले में 125, कोंडागांव में 15, बस्तर में 59, नारायणपुर में 11 दंतेवाड़ा में 112 , सुकमा जिले में 105 और बीजापुर जिले में 35 लीटर गोमूत्र की खरीदी हुई।

यह भी पढ़ें गौमूत्र खरीदने वाला पहला राज्य बना छत्तीसगढ़, सीएम भूपेश बघेल बने पहले विक्रेता, देखिये तस्वीरें

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