UP Police Encounter: 9 साल में 17000 एनकाउंटर, कितने हुए ढेर? योगीराज में पुलिस के एक्शन से कांप रहे माफिया!

UP Police Encounter: उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, मार्च 2017 से लेकर अब तक यानी पिछले 9 वर्षों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए कुल 17,043 एनकाउंटर (मुठभेड़) किए हैं।

आंकड़ों का गणित देखें तो यूपी में बीते 9 साल में हर दिन औसतन करीब 5 पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गई हैं। सरकार का दावा है कि संगठित अपराध और गंभीर अपराधों की कमर तोड़ने के लिए चलाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान है, जिसने राज्य में खौफ का पर्याय बने अपराधियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है।

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आइए जानतें हैं यूपी पुलिस के इस महा-अभियान के जोन वाइज आंकड़े, पुलिस को हुए नुकसान और दावों की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है:

एनकाउंटर में कितने ढेर, कितने हुए घायल?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन 9 वर्षों के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ों की पूरी तस्वीर इस प्रकार है:

  • कुल मुठभेड़: मार्च 2017 से अब तक राज्य में कुल 17,043 पुलिस एनकाउंटर हुए।
  • अपराधी ढेर: इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों में 289 कुख्यात अपराधी मारे गए हैं।
  • घायल और गिरफ्तार: मुठभेड़ों के दौरान 11,834 आरोपी घायल हुए, जबकि कुल 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
  • साल 2026 का आंकड़ा: सरकार ने बताया कि अकेले साल 2026 के शुरुआती 5 महीनों में ही अब तक 23 अपराधी पुलिस मुठभेड़ में ढेर किए जा चुके हैं।

मेरठ जोन में सबसे ज्यादा 'सफाई', वाराणसी दूसरे नंबर पर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सभी पुलिस जोनों में से मेरठ जोन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें ढेर करने में सबसे आगे रहा है।

  • मेरठ जोन (नंबर-1): यहां सबसे ज्यादा 4,813 एनकाउंटर हुए, जिनमें 97 कथित अपराधी मारे गए। इसके अलावा 3,513 संदिग्ध घायल हुए और 8,921 को गिरफ्तार किया गया।
  • वाराणसी जोन (नंबर-2): मुठभेड़ में मौत के मामले में वाराणसी दूसरे स्थान पर है। यहां 1,292 एनकाउंटर में 29 अपराधी ढेर किए गए, जबकि 2,426 गिरफ्तार और 907 घायल हुए।
  • आगरा जोन (नंबर-3): आगरा तीसरे पायदान पर है, जहां 2,494 मुठभेड़ों में 24 अपराधी मारे गए। यहाँ 5,845 आरोपियों को गिरफ्तार और 968 को घायल किया गया।

इसके अलावा बरेली जोन, लखनऊ जोन, गाजियाबाद कमिश्नरेट, कानपुर जोन, प्रयागराज जोन और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) कमिश्नरेट में भी बड़े स्तर पर एनकाउंटर दर्ज किए गए।

अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद

इस महा-अभियान में यूपी पुलिस को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अपराधियों की गोलियों का सामना करते हुए कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस के जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाई।

  • शहीद पुलिसकर्मियों का आंकड़ा: पूरे प्रदेश में इस दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए।
  • घायल जवान: मुठभेड़ों के दौरान अपराधियों की जवाबी फायरिंग में 1,852 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए।
  • मेरठ और वाराणसी में नुकसान: अकेले मेरठ जोन में अपराधियों से लड़ते हुए 2 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 477 घायल हुए। वहीं वाराणसी जोन में 104 और आगरा जोन में 62 पुलिसकर्मी जख्मी हुए।

राष्ट्रीय औसत से कितना कम हुआ UP में अपराध?

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े योगी सरकार के 'अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश' के दावों की पुष्टि करते हैं, जिसके अनुसार यूपी में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से करीब 28.5% कम दर्ज की गई है। जहां देश में प्रति लाख आबादी पर औसतन 252.3 संज्ञेय अपराध सामने आए, वहीं 24 करोड़ से अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा महज 180.2 रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में कुल दर्ज 4,30,552 संज्ञेय मामलों में से 2,21,615 मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) और 2,08,937 मामले भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज किए गए, जो यह साफ दर्शाता है कि अपराधियों पर नकेल कसने के कड़े पुलिसिया एक्शन का जमीन पर बड़ा असर हुआ है।

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पुलिस एनकाउंटर पर इलाहाबाद HC ने जताई थी गहरी चिंता

उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे पुलिस एनकाउंटर और अपराधियों के पैरों में गोली मारने के चलन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की सिंगल बेंच ने दो टूक कहा था कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं है और सजा देने का काम न्यायपालिका का है, न कि पुलिस का; प्रमोशन, वाहवाही या सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए पैर में गोली मारने की यह नियमित होती जा रही प्रथा न सिर्फ गलत बल्कि बेहद खतरनाक है। अ

दालत ने इसे सुप्रीम कोर्ट के पीयूसीएल (PUCL) दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन माना था और राज्य के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब करने के साथ ही पुलिस के लिए 6-पॉइंट गाइडलाइंस जारी की थी, जिसमें नियमों की अनदेखी पर संबंधित जिले के SP और SSP पर सीधे अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

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