हसदेव मामले में दिलचस्प हुई सियासत, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
अंबिकापुर, 02 जून। सरगुजा अंचल में विस्तारित हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान के लिए वनों की कटाई को लेकर जारी आंदोलन को देशभर और दुनियाभर में व्यापक समर्थन मिलता जा रहा है। इस मामले में आम आदमी पार्टी और भाजपा की तरफ से छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार के खिलाफ लगातार बयानबाजी की जा रही है। हसदेव मामले में जारी सियासत के बीच दिलचस्प बात सामने आ रही है। परसा खदान के विरोध में आंदोलनरत ग्रामीणों को सरगुजा कांग्रेस ने समर्थन दिया है।
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अपनी सरकार के फैसले के खिलाफ सरगुजा कांग्रेस, हसदेव के जंगलो को काटने का किया विरोध
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन करने के लिए लाखों पेड़ो की बलि ली जा रही है। प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने जंगलो को काटने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति देकर अपनी अच्छी खासी किरकिरी करवा ली है। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरगुजा में कांग्रेस के बड़े नेता और औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक की अगुवाई में जिला कांग्रेस और जिला और जनपद पंचायत सदस्यों ने हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन समर्थन किया है।

कांग्रेस की टीम को ग्रामीणों ने दिखाए कटे पेड़
मिली जानकारी के मुताबिक आंदोलनरत ग्रामीणों ने कांग्रेस की टीम को हसदेव अरण्य क्षेत्र में हुई पेड़ो की कटाई का मंजर दिखाया। अंबिकापुर के खनन प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने कहा कांग्रेस नेताओ से कहा है कि सरकार ने ग्राम सभा के फर्जी प्रस्ताव के सहारे उनकी जमीनें लूट कर अडानी कम्पनी को दे दी है,लेकिन गांव के लोग किसी भी कीमत पर अपना जंगल और जमीन नहीं देंगे। जिसपर पादप बोर्ड अध्यक्ष पाठक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अगर गांव वाले एक राय होकर खदान का विरोध करते हैं, तो पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है।

सिंहदेव समर्थकों ने कहा,हम ग्रामीणों के साथ
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव अंबिकापुर के विधायक है। सिंहदेव कई मंचों पर अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर ग्रामीणों के साथ खड़े रहने की बात कह चुके हैं। सिंहदेव समर्थकों का कहना है कि इस मसले पर गांव के लोगो को एक राय होना पड़ेगा, ग्राम सभा को लेकर भ्रम की स्थिति थी, आंदोलन के समर्थन में खड़े लोग इसे फर्जी बता रहे हैं , जबकि गांव के ही कुछ खदान के पक्ष में खड़े थे।
मिली जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव के भतीजे और सरगुजा जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने इस संबंध में जिला पंचायत ने दो बार प्रस्ताव पारित करके खनन प्रभावित गांवों में पूरे कोरम के साथ फिर से ग्रामसभा आयोजित करवाने कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि इससे पूर्व प्रशासन को पेड़ काटने सहित तमाम गतिविधियों को रोक देना चाहिए । आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में वीडियोकॉल करके धरने पर बैठे ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा है कि प्रशासन जिस कॉल बैरिंग एक्ट का हवाला दे रहा है, उसके तहत जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है, लेकिन वन अधिकार अधिनियम 2006 में यह साफ़ है कि वनों का संवर्धन,संरक्षण और उपयोगिता परिवर्तन ग्राम सभा की मंजूरी के बिना संभव नहीं है। इसलिए जबतक ग्रामसभा नहीं चाहेगी, हसदेव के जंगलों का एक भी पेड़ नहीं कटेगा। उन्होंने कहा कि हम सब गांव के लोगो के फैसले के के साथ खड़े हैं।

हसदेव बचाओ आंदोलन में कूदे सरगुजा के कांग्रेसी
बताया जा रहा है कि 28 मई को सरगुजा जिला पंचायत के प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत घाटबर्रा में ग्रामसभा की बैठक रखी गई थी। ग्राम के सरपंच के मुताबिक ग्रामसभा में सभा अध्यक्ष के नाम पर सहमति ना बन पाने के कारण बैठक को 4 जून के लिए टाल दिया गया। अधिकारियों ने सबके सामने घोषणा की थी कि वह जो कुछ लोग बता रहे है कि 28 मई की सभा को प्रशासन की मंजूरी दे दी है।हालांकि इसकी आधिकारिक सूचना पंचायत को नहीं दिया गया है। इधर उदयपुर के ग्राम बासेन, हरिहरपुर,साल्ही, घाटबर्रा आदि आधा दर्जन गांवो के सैकड़ों ग्रामीण जंगल में डेरा जमाए हुए है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि जनसहयोग से जंगल में ही खाने-पीने का बंदोबस्त किया जा रहा है ग्रामीणों के संघर्ष और उनकी मांग पर औषधीय पादप बोर्ड अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने तिरपाल और चावल के लिए दस हजार रुपए दिए हैं।
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