उत्तराखंड में पुलिस आंदोलन नहीं ला पाया रंग ,लेकिन छत्तीसगढ़ में पुलिसकर्मियों के चेहरे खिले
रायपुर, 04 जनवरी। चुनावी राज्य होने के बावजूद उत्तरखंड में पुलिस कर्मियों का संघर्ष रंग नहीं ला सका, लेकिन छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार ने पुलिस परिवारों के फरियाद सुन ली है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत सहायक आरक्षकों के लिए प्रमोशन का प्रावधान और वेतन भत्ते देने के संबंध में तैयार करके उसे शीघ्र लागू करने निर्देश जारी कर दिए हैं। सीएम भूपेश के इस कदम के बाद सहायक आरक्षकों का वेतन अब आरक्षकों के समकक्ष हो जायेगा और उन्हें भत्ते का लाभ भी मिलने लगेगा। इस घोषणा से सहायक आरक्षकों में हर्ष का माहौल है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशों का तत्काल पालन करने के लिए राज्य के डीजीपी अशोक जुनेजा की ओर से विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके सरकार को भेज दिया गया है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सहायक आरक्षकों के परिजन 6 दिसंबर से 1800 के स्थान पर 2800 रुपये ग्रेड भुगतान ,पेंशन ,साप्ताहिक अवकाश और प्रमोशन दिए जाने समेत कई अन्य मांगों को लेकर आंदोलन पर चले गए थे। पुलिस परिवार की मांगों पर विचार करने के लिए सीएम भूपेश बघेल एडीजी की अध्यक्षता मे कमेटी बनाने का ऐलान किया था,जिसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।
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उत्तराखंड में पुलिस आंदोलन को नहीं मिली सफलता
छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग में कार्यरत सहायक आरक्षकों को भूपेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का प्रतिफल मिलने वाला है, लेकिन उत्तराखंड में 2001 बैच के पुलिस सिपाहियों की तरफ से 4600 रुपये ग्रेड भुगतान की मांग को लेकर लम्बे समय से चल रहे आंदोलन पर बात नहीं बन पाई है। उत्तराखंड में आचार संहिता लग चुकी है और धामी कैबिनेट इस संबंध मे कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी। उत्तराखंड मे चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों की उम्मीदें लगभग टूट चुकी हैं। हालांकि धामी सरकार ने आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 2001 बैच के हर सिपाही को एकमुश्त दो लाख रुपये मानदेय देने का ऐलान किया है, लेकिन वित्तीय प्रोत्साहन के रूप मे 4600 ग्रेड भुगतान देने संबंधी मामला अभी भी सरकार की वेतन समिति के स्तर पर विचाराधीन है।












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