OPINION: जम गई मोदी साय की जोड़ी, डबल इंजन का कमाल, छत्तीसगढ़ के आदिवासी गांवों का होगा कायाकल्प
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में साढ़े 6 हजार से अधिक ग्रामों में लोगों के बेहतर जीवन स्तर के लिए 'प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान' के अंतर्गत गांवों में आदिवासी परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास के समेत सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। सीएम विष्णुदेव साय ने केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का राज्य में बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। डबल इंजन की सरकार के आने से हो रहे कामों की चौतरफा सराहना हो रही है।
गौरतलब है कि पीएम नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट द्वारा हाल में ही इस योजना को स्वीकृति दी गई है। इस अभियान के तहत आदिवासी बहुल गांवों और आकांक्षी जिलों में आदिवासी परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास संबंधी उपलब्धि अर्जित करने, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कनेक्टिविटी और लाईवलीहुड आदि अत्यावश्यक सेक्टर्स का अधोसंरचनात्मक सुधार के काम किए जाएगें।

आदिम जाति विकास मंत्री नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कुल 30.62 फीसदी जनजातीय जनसंख्या निवास करती है। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों के विकास हेतु भारत सरकार द्वारा राज्य के कुल 4029 ग्रामों का चिन्हांकन किया गया है। जिनमें से साल 2021-22 में 1530 ग्रामों का चयन किया गया था। इन ग्रामों में प्रति ग्राम 20.38 लाख के मान से राशि की स्वीकृति प्रदान की जाकर कार्यो का क्रियान्वयन किया जा रहा है। वहीं 733 ग्रामों की ग्राम विकास योजना केन्द्र सरकार को स्वीकृति के लिए प्रेषित की गई है।
मंत्री नेताम ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार द्वारा जनजातीय समुदायो को सामाजिक-आर्थिक रूप से मजबूत करने हेतु प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना को प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तौर में क्रियान्वित करने की मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के 32 जिलों के 138 विकासखण्डो के 6691 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांवों को शामिल किया गया है।
मंत्री नेताम ने बताया कि इस अभियान के तहत जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली की तरफ से ट्रायबल मल्टीपरपज मार्केटिंग सेन्टर्स, आश्रम शालाओं, छात्रावासों, शासकीय जनजातीय आवासीय विद्यालयों में अधोसंरचनात्मक सुधार, सिकलसेल डिजीज हेतु सपोर्ट-जागरूकता काउन्सलिंग और काम्पीटेन्स सेंटर की स्थापना, एफ.आर.ए. दावे की प्रक्रिया का डिजिटाइलेशन एवं सपोर्ट और एफ.आर.ए. सेल की स्थापना आदि गतिविधियों को शामिल किया जायेगा।
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