तेलंगाना: महिला नक्सली 'निर्मला' ने किया सरेंडर, 20 लाख रुपये का इनाम था घोषित, झीरम नक्सल हमले मे थी शामिल
Telangana: 1994 से नक्सली संगठन से जुड़ी रही और 2013 के झीरम घाटी हत्याकांड में अपनी भूमिका के लिए वांछित निर्मला, जिसे 'निर्मला' के नाम से भी जाना जाता है, ने शनिवार को तेलंगाना के वारंगल में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटना ने नक्सली गतिविधियों के खिलाफ चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। निर्मला पर छत्तीसगढ़ में घटित झीरम घाटी हत्याकांड में शामिल होने का आरोप था, जिसमें 30 कांग्रेस नेताओं की मौत हुई थी। पुलिस ने उसके सिर पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
नक्सली संगठन में प्रमुख भूमिका निभाई
निर्मला ने नक्सली संगठन में कई अहम भूमिकाएँ निभाई, जिसमें मेडिकल टीम की प्रभारी और दरभा डिवीजन कमेटी की सदस्य के रूप में कार्य करना शामिल है। वह तीन दशकों से नक्सल आंदोलन में सक्रिय थीं और उनकी यात्रा उनके भाइयों की मौत के बाद शुरू हुई, जो 1994 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे।

निर्मला ने 1994 में 10वीं कक्षा की पढ़ाई छोड़कर सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वार ग्रुप, नरसापेट दलम में शामिल होने का निर्णय लिया था। इसके बाद उनका निजी जीवन भी संगठन से जुड़ा रहा, और उन्होंने कई बार शादी की, जिनमें से एक पति पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुका था।
झीरम घाटी हत्याकांड में भूमिका
निर्मला पर आरोप है कि वह 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हत्याकांड में शामिल थीं, जिसमें नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार जैसे प्रमुख कांग्रेस नेताओं की हत्या कर दी गई थी। यह हमला नक्सलियों द्वारा की गई सबसे क्रूर घटनाओं में से एक था और इसकी जांच अभी भी जारी है। निर्मला का आत्मसमर्पण इस मामले में नए सुराग की संभावना को जन्म दे सकता है।
नक्सली गतिविधियों में व्यापक संलिप्तता
झीरम घाटी के अलावा, निर्मला पर नक्सल गतिविधियों में शामिल होने के कई अन्य आरोप भी हैं, जैसे नारनस्पेटा, एथुनगरम और अन्य पुलिस स्टेशनों पर हमले करना। उसकी गतिविधियाँ नक्सली संगठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती हैं।
आत्मसमर्पण से नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई में नया मोड़
वारंगल पुलिस आयुक्त अंबर किशोर झा के समक्ष निर्मला का आत्मसमर्पण नक्सलियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक नई दिशा का संकेत है। यह आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में नक्सलवाद से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्मला के आत्मसमर्पण से पुलिस को नक्सली संगठन और उनके द्वारा किए गए हमलों के बारे में और अधिक जानकारी मिलने की संभावना है, जो इस संघर्ष के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।












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