छत्तीसगढ़: मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के खिलाफ पत्रकारों का प्रदर्शन, SIT से जांच की मांग,3 आरोपी गिरफ्तार
Mukesh Chandrakar Murder Case: बीजापुर के युवा और साहसी पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के विरोध में प्रदेशभर के पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन किया। 3 जनवरी को मुकेश चंद्राकर का शव ठेकेदार के सेफ्टिक टैंक में पाया गया, जिसके बाद पत्रकारों ने नेशनल हाईवे पर धरना दिया और चक्का जाम किया। इस दौरान पत्रकारों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी, एसपी को सस्पेंड करने ,ठेकेदार की वैध और अवैध संपत्तियों की कुर्की, सरकारी टेंडर की निरस्तीकरण और बैंक खाते सीज करने की भी मांग की।
इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से मुख्य आरोपी ठेकेदार रितेश चंद्राकर को दिल्ली से पकड़ा गया है। पुलिस ने रितेश को बीजापुर लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि हत्याकांड में अन्य आरोपी भी शामिल हो सकते हैं और फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।

सेफ्टिक टैंक से बरामद हुआ था शव
मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी से लापता थे और उनका मोबाइल नंबर भी बंद था। उनके परिजनों और पत्रकारों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट बीजापुर थाने में दर्ज करवाई थी। बीजापुर एसपी ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की और बस्तर आईजी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर पत्रकार की जल्द तलाश करने का आश्वासन दिया था। बाद में मुकेश चंद्राकर का शव ठेकेदार के सेफ्टिक टैंक से बरामद हुआ। उनके भाई युकेश चंद्राकर ने शक जताया कि सड़क निर्माण से जुड़ा ठेकेदार मुकेश की गुमशुदगी और हत्या के पीछे हो सकता है।
उजागर किया था सड़क निर्माण के भ्रष्टाचार
मुकेश चंद्राकर ने हाल ही में बीजापुर जिले के मिरतुर इलाके में सड़क निर्माण के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू की थी। इस पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया है और पत्रकार संगठन इस मामले में एसआईटी जांच की मांग कर रहे हैं।
पत्रकार की हत्या, पक्ष और विपक्ष ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या पर दुख व्यक्त किया और कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपराधियों को कड़ी सजा देने का आदेश दिया और कहा कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा को शांति और परिजनों को सहनशक्ति देने की प्रार्थना भी की।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों को अपनी जान की कीमत पर पत्रकारिता करनी पड़ रही है, जो कि भयावह और चौंकाने वाली बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में पत्रकारों को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ रही है।
एसआईटी से जाँच करवाने की मांग
रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर और महासचिव डॉ. वैभव शिव पांडेय ने इस घटना को बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाला बताया। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पत्रकारों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी से करवाने की भी मांग भी पत्रकार संगठनों ने की है।
भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष गंगेश कुमार द्विवेदी ने भी इस जघन्य कृत्य की कड़ी निंदा की और कहा कि मुकेश चंद्राकर जैसे साहसी पत्रकारों की हत्या ने समाज में सच्चाई के प्रहरी के रूप में पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों को उजागर किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस हत्या ने बीजापुर और पूरे प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता के मुद्दे को फिर से उभार दिया है।
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