छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 20 से अधिक संगठन करेंगे 11 मार्च को बड़ा आंदोलन
More than 20 organizations will organize a big movement on March 11 in Raipur, the capital of Chhattisgarh
रायपुर, 08 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है ,इसी बीच आगामी 11 मार्च को छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले प्रदेश के 20 से अधिक सामाजिक सगठन अपनी 8 सूत्रीय मांगो को लेकर राजधानी रायपुर में बड़ा आंदोलन करने वाले हैं। यह संगठन 11 मार्च को रायपुर में एक दिवसीय धरना और विधानसभा तक पैदल मार्च करेंगे।

छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान से जुड़े सामाजिक संगठनों के विभिन्न नेताओं ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दो दशक बाद भी प्रदेश के मेहनतकश आदिवासी, किसान, मजदूर, कर्मचारी वर्ग अपने जायज अधिकारों के लिए संघर्षरत है l पिछले 15 वर्षो में रमन सरकार की कार्पोरेट परस्त, जन विरोधी नीतियां और उन्हें लागू करने के लिए बरते गए बेतहाशा दमन से त्रस्त होकर प्रदेश की जनता ने भारी बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनाई थी l
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छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान की तरफ से आगे कहा गया कि कांग्रेस सरकार के भी लगभग 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी जनता के मूल सवालों और उनके मुद्दों की लगातार अनदेखी हो रही है l आज की प्रदेश सरकार अपनी पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों का ही अनुसरण कर रही है l कांग्रेस ने अपने "जनघोषणा पत्र " में बस्तर में शांति की स्थापना के गंभीर प्रयासों का वादा किया था,परन्तु आज तक इस दिशा में कोई भी प्रयास राज्य सरकार द्वारा नही किए गए l बल्कि इसके विपरीत भाजपा शासन की तरह ही माओवादी समस्या के नाम पर पूरे बस्तर में सैन्यीकरण को तेज किया जा रहा है l यह कदम, लोगों के अधिकार की संयुक्त राष्ट घोषणा (UNDRIP) के अनुच्छेद 30 सहित अंतर्राष्ट्रीय संधियों का स्पष्ट उल्लंघन है l आज भी सम्पूर्ण बस्तर में आदिवासियों की फर्जी मुठभेड़ के जरिये हत्या, फर्जी मामलो में गिरफ्तारियां और दमन लगातार जारी है l
छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान के संयोजक आलोक शुक्ला की तरफ से जारी इस बयान में कहा गया कि छत्तीसगढ़ का लगभग 60% इलाका पांचवी अनुसूची में है, वाबजूद इसके यहां निवासरत आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने कोई भी कदम नही उठाये हैं l बयान में आगे कहा गया कि आज खेती-किसानी का संकट समूची ग्रामीण आबादी के संकट में बदल रहा है। किसान आत्महत्याओं के मामले में छत्तीसगढ़ आज भी देश में 5वें स्थान पर है। कोरोना संकट के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था में आई मंदी की मार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ रही है। बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी होने से हजारों लघु और मध्यम उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। सरकारी विभागों में आज भी एक लाख से ज्यादा पद खाली है, जबकि रोजगार दफ्तरों में 25 लाख बेरोजगार पंजीकृत है।
राज्य सरकार के समक्ष जारी रखी गई हैं छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की तरफ से 8 मांगे
(1 ) छत्तीसगढ़ में आदिवासी, किसान, मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बंद ना हो ।
(2) देशज लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करने वाले कदम- बढता सैन्यकरण, फ़र्ज़ी मुठभेड़ तथा फ़र्ज़ी मामलों में गिरफ्तारियां तुरंत बंद करने के साथ दोषी अधिकारी और व्यक्तियों पर अविलम्ब न्यायिक कार्रवाई हो ।
(3 ) पांचवी अनुसूची के क्षेत्रों में किसी भी परियोजना की स्थापना के पूर्व ग्रामसभा की मुक्त-संसूचित-अग्रिम-सहमति का अनिवार्यता पर नियम बनाया जाये।
(4 )जल-जंगल-जमीन पर समुदाय के अधिकारों को मान्यता देकर वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन ग्रामसभा को सुपुर्द किया जाये l
(5) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजटीय व्यय में वृद्धि करते हुए ग्रामसभाओं के निर्णय और नियंत्रण से कार्य किए जाने के पुख्ता प्रावधान किये जाए।
(6 ) स्व.चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कर्मचारियों का तत्काल संविलियन किया जाये l
(7) हसदेव अरण्य सहित प्रदेश के सम्पूर्ण पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति बिना जारी समस्त भूमि अधिग्रहण को रद्द की जाये।
(8) नवा राजधानी प्रभावित किसानो की मांगों को अविलंब पूरा की जाये l












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