अब छत्तीसगढ़ में होंगी कम से कम इतनी महिला विधायक, तो SC/ST और ओबीसी का गणित क्या होगा?
Chhattisgarh News: महिला आरक्षण बिल मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। इस बिल के तहत लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। विपक्षी दलों की ओर से भी इस बिल के समर्थन की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाएगा।इसकी संख्या कितनी होगी और क्या विधानसभा की सीटों में वृद्धि की जाएगी, इसपर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं आई है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है क्योंकि 33 फीसदी आरक्षण के बाद यहां की विधानसभा की तस्वीर एकदम बदल जाएगी।

छत्तीसगढ़ के इतिहास में 2018 विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार 90 सीट में से 16 सीट पर महिलाओं का कब्जा हुआ। छत्तीसगढ़ में महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी देश के कई राज्यों की तुलना में ज्यादा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा 2008 चुनाव में कुल 1 हजार 66 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे इसमें से 94 महिला और 972 पुरुष प्रत्याशी रहे। चुनाव परिणाम में 11 महिलाएं विधायक निर्वाचित हुई। इसमें से 6 विधायक भाजपा की थी और 5 विधायक कांग्रेस पार्टी से थीं।
2013 विधानसभा चुनाव में 986 प्रत्याशियो ने विधानसभा चुनाव लड़ा। इसमें से 83 महिला और 901 पुरुष प्रत्याशी थे। इसमें से केवल 10 महिला विधानसभा तक पहुंची और इसमें से 4 कांग्रेस और 6 बीजेपी की प्रत्याशी विधायक बनी।
2018 के विधानसभा चुनाव में 13 महिला उम्मीदवार विधायक बनीं। इसमें से 10 विधायक केवल कांग्रेस पार्टी से बनी। भाजपा ,जोगी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से एक- एक महिला उम्मीदवार विधायक बनी।
इसके अलावा इस 2018 से 2023 के बीच हुए उपचुनाओं में कांग्रेस ने 3 महिला प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा और तीनों ही विधानसभा चुनाव जीत गई। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 में से 16 महिला विधायक है और इसमें से 13 विधायक कांग्रेस पार्टी की है। आपको बता दें कि 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 13 और भाजपा ने 12 महिला प्रत्याशी को चुनाव में उतरा है।
कितने सीटों पर होगा महिला का कब्जा: छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल 90 सीटें है। इनमें से 29 सीटें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति 10 सीटें आरक्षित है। बाकी सभी सीटें सामान्य है। 51 सीटों से कोई भी प्रत्याशी चुनाव लड़ सकता है। आरक्षित और अनारक्षित लगभग अधिकांश सीटों पर पार्टियां पुरुष प्रत्याशियों को मौका देती आई है। महिला प्रत्याशियों की संख्या बहुत ही कम होती है। दोनों पार्टियां चुनाव के दौरान मुश्किल से 5 से 10 महिलाओं को टिकट देती है।
लेकिन जल्द ही इसमें बदलाव हो सकता है। इन बदलाव का असर छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 में से 30 सीटों पर दिखेगा। महिला आरक्षण बिल आने के बाद 30 सीटे महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी। फिलहाल छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनावों में 33 फ़ीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 14 फीसदी (14.44 फीसदी)
क्या जो विधानसभा और लोकसभा सीट महिला आरक्षित हो जाएगी तो वहां से हमेशा महिला जनप्रतिनिधि ही चुने जाएंगे? नहीं ऐसा नहीं होगा। जो विधानसभा या लोकसभा सीट महिलाओं के एक चुनाव में आरक्षित होगी आगामी चुनाव में वो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं होगी। बल्कि अन्य 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसके बाद जो तीसरा चुनाव होगा उसमें बची हुई 33 प्रतिशत सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
क्या एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीटों पर यह लागू होगा? हां, यानी कोटा के अंदर कोटा भी इस कानून में प्रावधान होगा। इस तरह जो सीटें एससी/एसटी के लिए आरक्षित हैं उनमें से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
क्या यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहेगी? यह प्रक्रिया सतत जारी रहने का नियम भी नहीं है। मौजूदा बिल में महिला आरक्षण को 15 वर्ष (आमतौर पर 3 चुनाव) के लिए लागू किया गया। इसके बाद संसद चाहे तो महिला आरक्षण को आगे बढ़ा सकती है। दिलचस्प ये है कि देश में जातिगत आरक्षण का प्रावधान भी 10 वर्ष के लिए लागू हुआ था, जो अब तक जारी है।
वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण है या नहीं? क्या पिछड़ा1996 से जब जब महिला आरक्षण बिल आए तब तब यह मुद्दा उठा है। कई राजनीतिक पार्टी ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी कोटा की मांग करते रहे हैं। हालांकि, इस बिल में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।












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